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Fairy Lantern: फेयरी लैंटर्न पौधे की खोज ने शोधकर्ताओं के जेहन में खड़े किए कई सवाल, पढ़ें पूरी खबर

Fairy Lantern: दुनिया में कई तरह की वनस्पतियां मौजूद हैं. इनमें से कुछ तो बहुत ही अजीबोगरीब है. आज हम आपके लिए एक ऐेसे पौधे के बारे में बता रहे हैं, जो लुप्त होने की कगार पर है.

Fairy Lantern: दुनिया में कई तरह की वनस्पतियां मौजूद हैं. इनमें से कुछ तो बहुत ही अजीबोगरीब है. आज हम आपके लिए एक ऐेसे पौधे के बारे में बता रहे हैं, जो वाकई बहुत अजीब होते हैं. अपने लालटेन जैसे फूलों के कारण ये किसी दूसरे ग्रह के जीव लगते हैं. अपना ये पौधे ज्यादातर जीवन जमीन के नीचे बिताते हैं, इनमें पत्तियां या क्लोरोफिल नहीं होते और ये जमीन में उगने वाले कवकों से अपना सारा पोषण ग्रहण करते हैं. इन पौधों का आधिकारिक नाम थिस्मिया है और इन्हें खोजना बेहद मुश्किल है.

ये अक्सर तभी दिखाई देते हैं जब इनके छोटे फूल ज़मीन से ऊपर निकलते हैं, हालांकि ऐसा एक सप्ताह से ज़्यादा समय तक नहीं रहता. दरअसल, ये पौधे इतने दुर्लभ हैं कि एक प्रजाति थिस्मिया नेप्टुनिस बोर्नियो में पहली बार खोजे जाने के 151 साल बाद ही दोबारा पाई गई और इसकी पहचान वनस्पति विज्ञानी ओडोआर्डो बेकारी द्वारा ली गई एक तस्वीर से की गई. उन्होंने मूल रूप से इस पौधे को खोजा था.

मलेशिया में मिली नई प्रजाति

अपने मायावी जीवन शैली के बावजूद थिस्मिया की एक नई प्रजाति हाल ही में मलेशिया के दो वर्षा वनों में खोज हुई. थिस्मिया मलायाना के छोटे प्याले के आकार के फूल पत्तों के ढेर और सड़ी हुई लकड़ियों से निकले हुए पाए गए. ये फूल भूरे और सफेद रंग के होते हैं, जिनके भीतरी भाग में गहरा पीला रंग होता है और इनमें चमकीले बैंगनी रंग के परागकोष होते हैं. फूल के ऊपरी भाग के चारों ओर कई विचित्र तंतुनुमा संरचनाएं होती हैं, जो इसे पौधे की बजाय समुद्री जीव जैसा रूप देती हैं. ऐसा माना जाता है कि ये तंतुनुमा संरचनाएं परागण करने वाली मक्खियों को आकर्षित करने में सहायक हो सकती हैं.

मलेशिया के कुआलालंपुर के पास एक फॉरेस्ट रिज़र्व के पिकनिक एरिया के किनारे एक अजीब पौधा खोजा गया. यह पौधा जिसे फेयरी लैंटर्न कहा जाता है, एक पैरासाइट है जो मिट्टी में रहने वाले माइकोराइज़ल फंगस से अपनी सारी एनर्जी और न्यूट्रिएंट्स चुरा लेता है. आमतौर पर ज़मीन के नीचे छिपा रहने वाला फेयरी लैंटर्न समय-समय पर एक गुलाबी रंग का फूल पैदा करता है जिसका ऊपरी हिस्सा गुंबद जैसा होता है, जो छाते जैसा दिखता है. इससे तीन टेंटेकल जैसी संरचनाएं निकलती हैं. यह पौधा एक नेचुरलिस्ट और फोटोग्राफर गिम स्यू टैन को नवंबर 2023 ज़मीन पर पत्तियों के बीच से झांकता हुआ मिला. उन्होंने पौधों, जानवरों और फंगस की पहचान करने वाले प्लेटफॉर्म iNaturalist पर तस्वीरें पोस्ट कीं.

लुप्तप्राय प्रजाति

ये तस्वीरें सिटि मुनिराह तक पहुंचीं, जो मलेशिया के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक बॉटनिस्ट हैं. उन्होंने कहा कि वह तुरंत समझ गईं कि वह एक अनदेखी प्रजाति को देख रही हैं. टैन, सिटि मुनिराह और उनके साथियों ने पिछले महीने PhytoKeys जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में इस पौधे के बारे में बताया और इसका नाम Thismia selangorensis रखा. शोधकर्ताओं के अनुसार इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय माना जाना चाहिए. 

फेयरी लैंटर्न के बारे में जानने लायक बातें

फेयरी लैंटर्न एक माइकोहेटेरोट्रोफ़ है, जो ऐसे पौधे के लिए आम शब्द है जो फंगस पर पैरासाइट की तरह रहता है. नीदरलैंड्स में नेचुरैलिस बायोडायवर्सिटी सेंटर के बायोलॉजिस्ट विंसेंट मर्कक्स ने कहा कि दुनिया भर में माइकोहेटेरोट्रोफ़ की केवल लगभग 550 ज्ञात प्रजातियां हैं. जैसे कि मोम जैसे सफेद घोस्ट पाइप, जो इस पेपर से जुड़े नहीं थे. यह पृथ्वी पर अनुमानित 435,000 पौधों की प्रजातियों का एक छोटा सा हिस्सा है. अजीब बात यह है कि 1912 में उत्तरी अमेरिका में शिकागो के बाहर एक घास के मैदान के किनारे थिस्मिया अमेरिकाना नाम की एक अकेली प्रजाति मिली थी. पहले इस हल्के रंग के पौधे को उसी इलाके में कुछ सालों तक फिर से इकट्ठा किया गया लेकिन फिर उस खेत में एक खलिहान बना दिया गया और वह पौधा फिर कभी नहीं मिला.

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