डॉक्टर माता-पिता की बेटी, 7 साल की उम्र में पिता को खोया, फिर मुंबई में झेले स्ट्रगल, ऐसी रही दिव्या दत्ता की जिंदगी
Divya Dutta: बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता ने अपनी दमदार अदाकारी से इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई है. पर्दे पर मां, बहन, दोस्त से लेकर गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों तक, उन्होंने हर रोल में अपनी छाप छोड़ी. हालांकि दिव्या दत्ता की निजी जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. महज 7 साल की उम्र में पिता को खोने से लेकर मां के साथ संघर्ष भरा बचपन रहा. इसके बाद मुंबई में करियर बनाने की जद्दोजहद और निजी जिंदगी को लेकर बेबाक फैसलों तक, उन्होंने जिंदगी में बहुत कुछ झेला.
खुद को समझती थीं राजकुमारी
दिव्या दत्ता का बचपन लुधियाना में बीता. उनके माता-पिता दोनों सरकारी डॉक्टर थे. बचपन का एक हिस्सा उन्होंने दिल्ली में अपनी बुआओं के साथ भी बिताया. हाल ही में उन्होंने बताया कि जब वह करीब चार साल की थीं और पिता उन्हें स्कूल लेने आते थे, तो उनके स्कूटर के आगे खड़े होकर उन्हें लगता था जैसे वह किसी राजकुमारी की तरह हैं और वही उनकी पूरी दुनिया है.
बचपन से ही लगा फिल्मों का चस्का
दिलचस्प बात यह है कि फिल्मों का चस्का भी उन्हें बचपन में ही लग गया था. दिल्ली में उनकी एक बुआ को फिल्में देखने का बहुत शौक था. दिव्या उनके साथ फिल्में देखतीं और फिर कभी नीतू कपूर, कभी जीनत अमान तो कभी हेमा मालिनी जैसा हेयरस्टाइल बनवाकर स्कूल जाने की जिद करती थीं. यहीं से उनके भीतर फिल्मों की दुनिया के लिए आकर्षण पैदा हुआ.
7 साल की उम्र में पिता को खोया
दिव्या की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया, जब महज सात साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया. इसके बाद उनकी मां ने अकेले ही दिव्या और उनके भाई की परवरिश की. दिव्या ने कई इंटरव्यू में अपनी मां को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत बताया है. उनके मुताबिक, मां ने कभी उन्हें लड़की होने की वजह से अपने फैसले लेने से नहीं रोका बल्कि अपनी बात रखने और गलतियां करने की आजादी दी. उनकी मां खुद डॉक्टर होने के साथ लेखन का भी शौक रखती थीं. दिव्या ने बताया है कि जब वह मुंबई में करियर बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब उनकी मां अखबारों में बेटी की खबरें तलाशा करती थीं. यहां तक कि उन्होंने दिव्या के लिए एक कविता भी लिखी थी.
आसान नहीं था मुंबई का स्ट्रगल
स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही दिव्या को एक्टिंग और डांस का शौक था. वह कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थीं लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ. इंडस्ट्री में उनका कोई गॉडफादर नहीं था और शुरुआत में काम मिलना आसान नहीं था. दिव्या ने बताया है कि उस समय उनकी मां ने उन्हें सलाह दी थी कि रोल छोटा हो या बड़ा, बस उसे पूरी ईमानदारी से निभाना. दिव्या ने यही किया और धीरे-धीरे छोटे किरदारों से उनकी पहचान बनने लगी.
दिव्या दत्ता की पर्सनल लाइफ
दिव्या दत्ता की निजी जिंदगी भी अक्सर चर्चा में रही है. खासकर उनकी शादी को लेकर उनसे बार-बार सवाल पूछे जाते हैं. 2026 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि वह शादी को अपनी जिंदगी की अनिवार्यता नहीं मानतीं. उन्होंने कहा कि वह प्यार के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल शादी से ज्यादा एक साथी की तलाश है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य के बारे में पूरी तरह कुछ तय नहीं करतीं.
तीन दशक से ज्यादा का सफर
दिव्या दत्ता का फिल्मी सफर अब तीन दशक से भी ज्यादा लंबा हो चुका है. इस दौरान उन्होंने मुख्य किरदारों के साथ-साथ ऐसे सपोर्टिंग रोल भी किए, जो दर्शकों की याद में रह गए. वह खुद कह चुकी हैं कि हर किरदार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाना उनके लिए चुनौती भी रहा है.