Night Job: नाइट शिफ्ट वालों के लिए अलर्ट! हार्मोन और कोलेस्ट्रॉल पर असर, ये 5 समस्याएं तेजी से बढ़ रहीं
Night Shift Job: रात की शिफ्ट में काम करने से न केवल आपकी नींद का चक्र बिगड़ता है, बल्कि इसका स्वास्थ्य पर गंभीर असर भी पड़ सकता है और पुरानी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. रात की शिफ्ट मुख्य रूप से शरीर की सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) को बिगाड़ देती है जो नींद और जागने के चक्र तथा शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है और रात में काम करने वालों के सामने आने वाली यह एक बड़ी चुनौती है.
रिसर्च
इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च में पाया गया कि रात की शिफ्ट में काम करने से शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन के स्तर में काफी गड़बड़ी होती है, यहां तक कि अपेक्षाकृत कम उम्र के और पूरी तरह से स्वस्थ लोगों में भी रिसर्च किया गया.
डॉक्टर क्या कहते हैं
हैदराबाद के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के डॉक्टरों ने पाया है कि नियमित दिन की शिफ्ट में काम करने की तुलना में, रात की शिफ्ट शरीर की आंतरिक रासायनिक संरचना को प्रभावित करती है और इंसुलिन प्रतिरोध, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हार्मोनल असंतुलन का जोखिम बढ़ाती है.
इंसुलिन रेजिस्टेंस
अध्ययन में पाया गया कि नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में इंसुलिन रेजिस्टेंस की दर काफी ज्यादा थी. इसका मतलब है कि उनके शरीर शर्करा को प्रोसेस करने के लिए इंसुलिन का इस्तेमाल करने में कम असरदार हो गए थे जो कि टाइप 2 मधुमेह के विकसित होने का एक बड़ा चेतावनी संकेत है. नाइट शिफ्ट में काम करने वाले 77% लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण देखे गए, जबकि डे शिफ्ट में काम करने वालों में यह आंकड़ा केवल 62% था.
हॉर्मोन पर सीधा असर
जब सोने-जागने का समय नियमित नहीं होता, तो शरीर के जरूरी हॉर्मोन भी गड़बड़ा जाते हैं. खास तौर पर, मेलाटोनिन (जो नींद से जुड़ा है) और कोर्टिसोल (जो तनाव को नियंत्रित करता है) का संतुलन बिगड़ने लगता है. इस असंतुलन के लक्षण थकान, चिड़चिड़ापन और वजन बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकते हैं. यही वजह है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में हॉर्मोनल असंतुलन ज्यादा देखने को मिलता है.
कोलेस्ट्रॉल
जो लोग रात में काम करते हैं, वे अक्सर अनियमित समय पर खाना खाते हैं, और उनकी शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाती है. अध्ययनों के मुताबिक, इससे शरीर में "खराब" कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ सकता है. यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इसके परिणामस्वरूप हृदय रोग होने का खतरा बढ़ सकता है.
डायबिटीज
नाइट शिफ्ट का असर सिर्फ नींद तक ही सीमित नहीं रहता है. यह शरीर के ब्लड शुगर कंट्रोल सिस्टम पर भी असर डालता है. रिसर्च में पाया गया है कि इससे इंसुलिन का काम करने का तरीका बिगड़ जाता है, जिससे ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है. यही वजह है कि ऐसे लोगों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.
विटामिन D की कमी
जो लोग नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, वे अक्सर दिन के समय बाहर कम समय बिताते हैं, जिसके कारण उन्हें सूरज की रोशनी कम मिल पाती है. इसका सीधा असर विटामिन D के स्तर पर पड़ता है. यह विटामिन हड्डियों के स्वास्थ्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत जरूरी है. इसकी कमी से शरीर में लगातार कमजोरी और थकान बनी रहती है.
स्टडी
यह अध्ययन हाल ही में एक इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुआ था, जिसमें शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबे समय तक नाइट शिफ्ट में काम करने का मेटाबॉलिज्म, हॉर्मोन और दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. यदि आपका भी नाइट जॉब है तो थोड़ा सावधान रहना जरूरी है.