भूटान की पवित्र चोटी से लेकर अंटार्कटिका के वीरान पर्वत तक… दुनिया के वो 5 पहाड़, जहां आज तक नहीं पहुंचा इंसान
Unclimbed mountains of the world: एवरेस्ट जैसी दुनिया की मशहूर चोटियों पर कई सफल अभियान हो चुके हैं, लेकिन आज भी कई विशाल और दुर्गम पर्वत ऐसे हैं जिनका शिखर इंसान ने नहीं छुआ है. भूटान का गंगखर पुएंसुम, तिब्बत का लाबुचे कांग III और माउंट कैलाश से लेकर पाकिस्तान-चीन सीमा के सुम्मा री तथा अंटार्कटिका का माउंट सिपल तक, इन चोटियों के पीछे अलग-अलग वजहें हैं. कहीं चढ़ाई तकनीकी रूप से बेहद कठिन है तो कहीं धार्मिक या भौगोलिक कारण रास्ता रोकते हैं.
दुनिया में अब भी हैं ‘अनछुए’ पहाड़
एवरेस्ट, डेनाली और किलिमंजारो जैसी चोटियों पर सैकड़ों बार इंसान कदम रख चुके हैं, लेकिन दुनिया में आज भी कई ऐसे पहाड़ मौजूद हैं जिनका शिखर अब तक अछूता है. कुछ पहाड़ बेहद दुर्गम और तकनीकी रूप से मुश्किल हैं, जबकि कुछ धार्मिक या राजनीतिक कारणों से पर्वतारोहियों के लिए बंद हैं. यही अनछुए शिखर अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए अलग तरह का आकर्षण रखते हैं.
गंगखर पुएंसुम, भूटान
भूटान का गंगखर पुएंसुम दुनिया का सबसे ऊंचा ऐसा पर्वत माना जाता है जिसकी सफल चढ़ाई अब तक नहीं हुई है. इसकी ऊंचाई लगभग 25 हजार फीट है. भूटान में पर्वतों को पवित्र माना जाता है और पर्वतारोहण पर प्रतिबंध होने के कारण यह चोटी आज भी अनछुई है. 1994 में 6,000 मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ाई प्रतिबंधित की गई और बाद में देश में पर्वतारोहण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.
लाबुचे कांग III, तिब्बत
लाबुचे कांग III को उन सबसे ऊंचे अनचढ़े पहाड़ों में गिना जाता है जिन पर चढ़ाई के लिए सामान्य तौर पर प्रतिबंध नहीं है. 2018 में ल्यूक स्मिथविक के नेतृत्व वाली टीम ने यहां चढ़ने की कोशिश की थी. टीम बेहद खड़ी बर्फीली दीवार तक पहुंची, लेकिन खराब मौसम के पूर्वानुमान के चलते शिखर से पहले ही लौटना पड़ा. इस इलाके में दरारों वाले ग्लेशियर, तेज हवाएं और बेहद तकनीकी चढ़ाई बड़ी चुनौती हैं.
माउंट कैलाश, तिब्बत
माउंट कैलाश अपनी ऊंचाई से ज्यादा धार्मिक महत्व के कारण दुनिया के सबसे चर्चित पहाड़ों में शामिल है. हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि यह बौद्ध, जैन और बोन परंपराओं में भी पवित्र है. यहां श्रद्धालु परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पर्वतारोहण की अनुमति नहीं है. काले चट्टानी चेहरे और बर्फ से ढकी इसकी लगभग सीधी दीवारें इसे बेहद अलग रूप देती हैं.
सुम्मा री I और II, पाकिस्तान-चीन सीमा
काराकोरम में पाकिस्तान और चीन की सीमा के पास मौजूद सुम्मा री I और II दुनिया की सबसे ऊंची अनचढ़ी चोटियों में शामिल हैं. यहां पहुंचने का रास्ता ग्लेशियरों, गहरी दरारों और हिमस्खलन के खतरे से भरा है. दुर्गमता इतनी अधिक है कि ये चोटियां पर्वतारोहण की दुनिया में भी ज्यादा चर्चित नहीं हैं. इनके आसपास का इलाका एक बड़ी प्राकृतिक चुनौती पेश करता है.
माउंट सिपल, अंटार्कटिका
माउंट सिपल ऊंचाई में बाकी पहाड़ों की तुलना में छोटा है, लेकिन इसकी असली चुनौती इसकी लोकेशन है. यह अंटार्कटिका के सिपल द्वीप पर स्थित एक बेहद दूरस्थ क्षेत्र में है. आसपास कोई आबादी या नियमित शोध केंद्र नहीं है. यहां तक पहुंचना ही इतना कठिन है कि यह पहाड़ अब तक सफलतापूर्वक चढ़ा नहीं जा सका है. यह एक शील्ड ज्वालामुखी भी है, जो बर्फीले अंटार्कटिक परिदृश्य के बीच अलग पहचान रखता है.
आखिर क्यों नहीं चढ़े गए ये पहाड़?
इन चोटियों के अनचढ़े रहने की एक ही वजह नहीं है. कहीं रास्ता बेहद लंबा और दुर्गम है, कहीं ग्लेशियर और गहरी दरारें रास्ता रोकती हैं, तो कहीं खड़ी बर्फीली दीवारें तकनीकी चुनौती बन जाती हैं. कुछ पहाड़ धार्मिक कारणों से बंद हैं. अनुभवी पर्वतारोही किसी अनचढ़ी चोटी पर जाने से पहले पुराने अभियान रिकॉर्ड, नक्शों और संभावित बेस कैंप तक पहुंचने के रास्तों का अध्ययन करते हैं.
अनछुई चोटियों की सूची लगातार बदल रही है
दुनिया की सबसे ऊंची अनचढ़ी चोटियों की सूची हमेशा एक जैसी नहीं रहती. जैसे 2024 में पाकिस्तान की 24,591 फीट ऊंची Muchu Chhish चोटी पर पहली सफल चढ़ाई हुई, जो लंबे समय से पर्वतारोहियों को चुनौती देती रही थी. यानी जैसे-जैसे नई चोटियों पर इंसान पहुंच रहा है, दुनिया के बाकी अनछुए पहाड़ों की सूची भी छोटी होती जा रही है.