Mohatta Palace: पाकिस्तान में हिंदू कारोबारी ने अपनी बीबी के लिए ऐसा क्या बनाया? बटवारे के बाद जिसको पाने के लिए लड़ने लगे दिग्गज; अब कहलाता है पाक का ताज
Mohatta Palace: पाकिस्तान के कराची में क्लिफ्टन समुद्र तट की ओर जाते समय गुलाबी और पीले पत्थरों से बनी एक भव्य इमारत लोगों का ध्यान खींचती है. इसे मोहट्टा पैलेस के नाम से जाना जाता है. इस महल का इतिहास प्रेम, बंटवारे, राजनीति और कई कानूनी विवादों से जुड़ा है. कभी एक कारोबारी ने इसे अपनी पत्नी के लिए बनवाया था, लेकिन समय के साथ यह पाकिस्तान की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर बन गया.
पत्नी के लिए बनवाया था महल
मोहट्टा पैलेस का निर्माण हिंदू मारवाड़ी कारोबारी शिव रतन चंद्र मोहट्टा ने करवाया था. उनकी पत्नी एक गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. डॉक्टरों ने उन्हें ताजी हवा में रहने की सलाह दी थी. ऐसे में शिव रतन ने समुद्र के पास एक बंगला बनवाने का फैसला किया, जो आगे चलकर महल के रूप में प्रसिद्ध हुआ. साल 1927 में बनकर तैयार हुई इस इमारत के निर्माण में जोधपुर के गुलाबी पत्थरों और कराची के स्थानीय पीले पत्थरों का इस्तेमाल किया गया. इसका नक्शा तैयार करने की जिम्मेदारी वास्तुकार अहमद हुसैन आगा को दी गई थी, जिन्हें विशेष रूप से जयपुर से कराची बुलाया गया था.
खास वास्तुकला
महल में गुंबद, मेहराबें, मीनारें और खूबसूरत नक्काशी इसकी वास्तुकला को खास बनाते हैं. पत्थरों पर फूलों और मोर के चित्र उकेरे गए हैं. इमारत में बर्मा टीक की लकड़ी का भी इस्तेमाल हुआ था. कभी इसकी छत से समुद्र का शानदार नजारा दिखाई देता था. यहां से पास के एक मंदिर तक जाने वाली सुरंग होने की बात भी कही जाती है, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया.
बंटवारे के बाद बदल गई महल की कहानी
पाकिस्तान बनने के बाद मोहट्टा पैलेस को विदेश मंत्रालय का कार्यालय बनाने के लिए चुना गया. उस समय शिव रतन मोहट्टा कराची में ही रहना चाहते थे, लेकिन महल खाली करने की स्थिति बनने पर उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया.
बनाया गया पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय
पाकिस्तान के वरिष्ठ नौकरशाह सैयद हाशिम रजा ने अपनी किताब 'हमारी मंजिल' में इस घटना का उल्लेख किया है. उनके अनुसार, शिव रतन ने मोहम्मद अली जिन्ना से अपना पसंदीदा घर वापस पाने के लिए मदद मांगी थी. हालांकि, जिन्ना ने कहा कि इस मामले में फैसला लेने का अधिकार उनके पास नहीं है. इसके बाद मोहट्टा पैलेस में विदेश मंत्रालय का कार्यालय चलाया गया. लेकिन राजधानी कराची से इस्लामाबाद स्थानांतरित होने के बाद यह इमारत वीरान पड़ गई.
फातिमा जिन्ना ने बनाया अपना घर
बाद में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना ने इस महल में रहना शुरू किया. उन्होंने अपने भाई के मुंबई स्थित घर के बदले मोहट्टा पैलेस को चुना था. उस समय इमारत की हालत काफी खराब थी. सफाई और मरम्मत के बाद इसे 'कस्र-ए-फातिमा' नाम भी दिया गया. फातिमा जिन्ना ने सैन्य शासक अयूब खान के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था. उस दौर में मोहट्टा पैलेस उनके चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना. वह करीब साढ़े तीन साल तक यहां रहीं और इसी महल में उनका निधन हुआ. फातिमा जिन्ना के बाद उनकी बहन शिरीन जिन्ना यहां रहने लगीं. साल 1980 में उनके निधन तक यह उनका निवास रहा. इस दौरान महल के मालिकाना हक को लेकर विवाद शुरू हो गया और मामला अदालत पहुंच गया. अदालत के आदेश पर इमारत को सील भी कर दिया गया.
2021 में सिंध हाई कोर्ट का आदेश
शिरीन जिन्ना चाहती थीं कि इस महल में लड़कियों के लिए मेडिकल और डेंटल कॉलेज बनाया जाए. हालांकि, कानूनी विवादों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी. अक्टूबर 2021 में सिंध हाई कोर्ट की एकल पीठ ने भी इस संबंध में आदेश दिया था, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण इसे लागू करना संभव नहीं हुआ.
बेनजीर भुट्टो ने बदली पैलेस की किस्मत
साल 1995 में बेनजीर भुट्टो की सरकार ने सिंध सरकार को मोहट्टा पैलेस खरीदने के लिए धन दिया. इसके बाद इमारत की मरम्मत और संरक्षण का काम शुरू हुआ. साल 1999 में इसे संग्रहालय के रूप में आम लोगों के लिए खोल दिया गया. आज यहां प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी तस्वीरें, गहने, सिक्के, कपड़े, हस्तशिल्प और पाकिस्तान के शुरुआती नोट प्रदर्शित किए जाते हैं. धातु और पत्थर की मूर्तियां भी संग्रहालय का हिस्सा हैं. यहां समय-समय पर कला प्रदर्शनियां और मुशायरे आयोजित किए जाते हैं.