नाक-मुंह के आसपास क्यों दिखता है कालापन? सिर्फ पिग्मेंटेशन नहीं, ये स्किन प्रॉब्लम भी हो सकती है वजह
Darkness around nose: नाक के किनारों या मुंह के आसपास कालापन नजर आए तो अक्सर लोग इसे पिग्मेंटेशन समझकर तरह-तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन हर बार इसकी वजह सिर्फ पिग्मेंटेशन नहीं होती. नाक के फोल्ड्स में ऑयलीनेस, सेबोरिक डर्मेटाइटिस और बार-बार होने वाली इंफ्लेमेशन भी त्वचा को डार्क बना सकती है. ऐसे में कालापन कम करने से पहले उसकी असली वजह समझना जरूरी है. जानिए नाक और मुंह के आसपास की डार्कनेस को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
नाक-मुंह के आसपास क्यों दिखता है कालापन?
नाक के किनारों या मुंह के आसपास अचानक कालापन नजर आने लगे तो इसे केवल सामान्य पिग्मेंटेशन समझना सही नहीं है. इसके पीछे ब्लैकहेड्स, स्किन इंफ्लेमेशन या सेबोरिक डर्मेटाइटिस जैसी वजहें भी हो सकती हैं. बार-बार होने वाली सूजन और जलन के बाद इस हिस्से में पोस्ट-इंफ्लेमेटरी पिग्मेंटेशन हो सकती है, जिससे त्वचा ज्यादा डार्क नजर आती है.
नाक पर काले दाने ब्लैकहेड्स तो नहीं?
नाक के ऊपर नजर आने वाले छोटे-छोटे काले दाने ब्लैकहेड्स हो सकते हैं. ये पिग्मेंटेशन से अलग दिखाई देते हैं और आमतौर पर छोटे काले डॉट्स जैसे नजर आते हैं. वहीं, नाक के किनारों पर फैला हुआ कालापन किसी अन्य स्किन कंडीशन से जुड़ा हो सकता है. इसलिए दोनों को एक ही समस्या मानकर इलाज करना सही नहीं है.
नाक के फोल्ड्स में क्यों होती है इंफ्लेमेशन?
नाक के किनारों की त्वचा मुड़ी हुई होती है और इस हिस्से में सीबम यानी ऑयल का उत्पादन ज्यादा हो सकता है. अधिक ऑयलीनेस के कारण मलेसेजिया यीस्ट की वृद्धि बढ़ सकती है. इससे रेडनेस, खुजली, फ्लेकिंग और इंफ्लेमेशन जैसी समस्याएं ट्रिगर हो सकती हैं. बार-बार होने वाली यही इंफ्लेमेशन बाद में त्वचा पर गहरे निशान छोड़ सकती है.
सेबोरिक डर्मेटाइटिस भी हो सकता है कारण
नाक या मुंह के आसपास का कालापन हमेशा सिर्फ पिग्मेंटेशन नहीं होता. यह सेबोरिक डर्मेटाइटिस से जुड़ा हो सकता है. इस स्थिति में रेडनेस, खुजली और पपड़ी जैसी समस्या हो सकती है. इंफ्लेमेशन बार-बार होने पर उसके बाद पोस्ट-इंफ्लेमेटरी पिग्मेंटेशन विकसित हो सकती है, जिसे इस संदर्भ में सेबोरिक मेलानॉनिस कहा जाता है.
धूप से बढ़ सकता है कालापन
इंफ्लेमेशन के साथ लगातार सन एक्सपोजर भी पिग्मेंटेशन को ज्यादा गहरा और जिद्दी बना सकता है. इसलिए प्रभावित हिस्से को धूप से बचाना जरूरी है. ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा को आगे और डार्क होने से बचाने में मदद कर सकता है. खासकर बाहर निकलते समय सन प्रोटेक्शन को स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाना चाहिए.
सबसे पहले इंफ्लेमेशन को करें कंट्रोल
नाक के फोल्ड्स पर पिग्मेंटेशन कम करने से पहले सक्रिय इंफ्लेमेशन को कंट्रोल करना जरूरी है. अगर रेडनेस, खुजली या पपड़ी की समस्या बनी हुई है तो पहले उसके कारण का पता लगाना चाहिए. इसके लिए डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह ली जा सकती है. डॉक्टर जरूरत के मुताबिक प्रभावित हिस्से के लिए क्रीम या जेल लिख सकते हैं.
इंफ्लेमेशन कम होने के बाद इन इंग्रीडिएंट्स पर ध्यान
जब त्वचा की रेडनेस, खुजली और फ्लेकिंग कम हो जाए तो पिग्मेंटेशन को कम करने वाले कुछ इंग्रीडिएंट्स स्किन केयर में शामिल किए जा सकते हैं. कोजिक एसिड और एरबुटिन जैसे इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल किया जाता है. हाइड्रोक्विनोन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए. हर स्किन पर एक जैसा प्रोडक्ट काम करे, यह जरूरी नहीं है.
फेयरनेस क्रीम लगाना समाधान नहीं
नाक या मुंह के आसपास कालापन दिखने पर तुरंत कोई भी फेयरनेस क्रीम लगाना सही तरीका नहीं है. अगर इसके पीछे इंफ्लेमेशन है तो पहले उसी को कंट्रोल करना जरूरी है. बिना कारण समझे पिग्मेंटेशन कम करने की कोशिश करने से समस्या बढ़ भी सकती है. लगातार कालापन, खुजली, रेडनेस या पपड़ी की समस्या हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.