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Home > राज्य > हरियाणा > हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार से बनी सहमति; सप्लाई बहाल करने की तैयारी

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार से बनी सहमति; सप्लाई बहाल करने की तैयारी

Haryana Electricity Strike: हरियाणा में काफी समय से बिजली कर्मचारी हड़ताल पर थे, जो अब खत्म हो गई है. बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी, जो जल्द सही करने की बात कही जा रही है.

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Last Updated: October 23, 2026 19:51:26 IST

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Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली संकट से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. बिजली कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया है. कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक में सरकार ने उनकी मांगों को मानने पर सहमति जताई है. इसके बाद हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया गया. अब बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम शुरू किया जाएगा.

पिछले कुछ समय से जारी इस विरोध प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही थीं. इसका असर घरों, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ा था. हड़ताल खत्म होने से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.

बैठक के बाद हड़ताल खत्म

बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में हड़ताल शुरू की थी. शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई. बैठक के बाद कर्मचारी पक्ष ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, इसलिए हड़ताल खत्म की जा रही है. इस फैसले से बिजली विभाग के कामकाज को सामान्य करने का रास्ता खुला है. हालांकि, आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने में स्थानीय परिस्थितियों और तकनीकी काम के अनुसार कुछ समय लग सकता है.

क्या बोले अनिल विज?

मंत्री अनिल विज ने हड़ताल खत्म होने के बाद कहा कि उन्होंने और सीएम सैनी ने लेटर पर साइन कर दिया है. वो लेटर विभाग को सौंप दिया गया है. इस पर कार्रवाई की जाएगी और इसे जल्द रोका जाएगा. यूनियन की कुछ मांगे थीं, जिन पर विभाग काम कर रहा है लेकिन आज कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा नहीं की है. उसके लिए 3 नवंबर दोपहर तीन बजे का समय निश्चित किया गया है.

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों का मुख्य विरोध बिजली व्यवस्था के निजीकरण को लेकर था. कर्मचारियों को आशंका थी कि निजीकरण की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों से विभाग की मौजूदा व्यवस्था, नौकरियों की सुरक्षा और सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है. इसी मुद्दे पर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किया. उनकी मांग थी कि बिजली विभाग के निजीकरण की योजना पर रोक लगाई जाए और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार स्पष्ट आश्वासन दे. संगठन लंबे समय से इन सवालों पर बातचीत और समाधान की मांग कर रहे थे. बैठक के बाद संगठन ने दावा किया कि सरकार उनकी मांगों पर सहमत हो गई है.

ये भी पढ़ें: Delhi Pollution Rules: 1 नवंबर से दिल्ली में इन गाड़ियों की नो एंट्री! जानें किन वाहन चालकों पर पड़ेगा असर

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Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली संकट से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. बिजली कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया है. कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक में सरकार ने उनकी मांगों को मानने पर सहमति जताई है. इसके बाद हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया गया. अब बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम शुरू किया जाएगा.

पिछले कुछ समय से जारी इस विरोध प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही थीं. इसका असर घरों, पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ा था. हड़ताल खत्म होने से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.

बैठक के बाद हड़ताल खत्म

बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में हड़ताल शुरू की थी. शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई. बैठक के बाद कर्मचारी पक्ष ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं, इसलिए हड़ताल खत्म की जा रही है. इस फैसले से बिजली विभाग के कामकाज को सामान्य करने का रास्ता खुला है. हालांकि, आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने में स्थानीय परिस्थितियों और तकनीकी काम के अनुसार कुछ समय लग सकता है.

क्या बोले अनिल विज?

मंत्री अनिल विज ने हड़ताल खत्म होने के बाद कहा कि उन्होंने और सीएम सैनी ने लेटर पर साइन कर दिया है. वो लेटर विभाग को सौंप दिया गया है. इस पर कार्रवाई की जाएगी और इसे जल्द रोका जाएगा. यूनियन की कुछ मांगे थीं, जिन पर विभाग काम कर रहा है लेकिन आज कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा नहीं की है. उसके लिए 3 नवंबर दोपहर तीन बजे का समय निश्चित किया गया है.

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों का मुख्य विरोध बिजली व्यवस्था के निजीकरण को लेकर था. कर्मचारियों को आशंका थी कि निजीकरण की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों से विभाग की मौजूदा व्यवस्था, नौकरियों की सुरक्षा और सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है. इसी मुद्दे पर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन किया. उनकी मांग थी कि बिजली विभाग के निजीकरण की योजना पर रोक लगाई जाए और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार स्पष्ट आश्वासन दे. संगठन लंबे समय से इन सवालों पर बातचीत और समाधान की मांग कर रहे थे. बैठक के बाद संगठन ने दावा किया कि सरकार उनकी मांगों पर सहमत हो गई है.

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