S Badrinath: कहलाते थे घरेलु क्रिकेट के ‘रन मशीन’, फिर भी टीम इंडिया से हुए नजरअंदाज! CSK के ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ की अनसुनी कहानी
सुब्रमण्यम बद्रीनाथ (जन्म 30 अगस्त 1980) भारत के एक बेहतरीन बल्लेबाज़ रहे हैं. उन्होंने भारत के लिए तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी-20) मिलाकर कुल 10 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. तमिलनाडु के इस ‘रन-मशीन’ बल्लेबाज़ के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके करियर और जीवन से जुड़ी 11 दिलचस्प बातें:
1. पिता ने बचपन में ही पहचान लिया था हुनर
बद्रीनाथ के हुनर को उनके पिता ने बहुत छोटी उम्र में ही पहचान लिया था. स्कूल के दिनों से ही उन्होंने क्रिकेट में अपना नाम बनाना शुरू कर दिया था. सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानने वाले बद्रीनाथ का सपना भी अपने हीरो की तरह देश के लिए खेलना था.
2. बड़े स्कूल से पढ़ाई
उनकी पढ़ाई चेन्नई के मशहूर 'पद्मा शेषाद्री बाला भवन' स्कूल से हुई. दिलचस्प बात यह है कि बाद में भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी इसी स्कूल में पढ़े. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और साउथ के सुपरस्टार सूर्या और राम चरण भी इसी स्कूल के छात्र रहे हैं.
3. इंग्लैंड 'ए' के खिलाफ शानदार शतक
बद्रीनाथ ने साल 2000 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा. 2004 में दिलीप ट्रॉफी के एक मैच में साउथ जोन की तरफ से खेलते हुए उन्होंने स्टार खिलाड़ियों से सजी इंग्लैंड 'ए' टीम के खिलाफ 100 रनों की पारी खेली. इंग्लैंड टीम में केविन पीटरसन और मैट प्रायर जैसे बड़े नाम थे. 501 रनों का पीछा करते हुए बद्रीनाथ ने वेणुगोपाल राव के साथ मिलकर पांचवें विकेट के लिए 212 रन जोड़े थे.
4. मजबूत भारतीय टीम की वजह से नहीं मिला ज्यादा मौका
बद्रीनाथ जब अपने करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे, तब भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और युवराज सिंह जैसे दिग्गज मौजूद थे. ऐसे में टीम में जगह बनाना बेहद मुश्किल था और वह लगातार राष्ट्रीय चयन से चूकते रहे.
5. 2007 में हुई शादी
फरवरी 2007 में बद्रीनाथ ने सुनीति से शादी की. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए कहा था कि सुनीति उनके लिए लकी साबित हुई हैं और उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया है.
6. लगातार नजरअंदाज होने पर छलका दर्द
घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बाद भी जब उन्हें मौका नहीं मिला, तो उनका दर्द छलक पड़ा. 2008 के श्रीलंका दौरे पर जब वीरेंद्र सहवाग चोटिल हुए, तो 19 साल के विराट कोहली को बद्रीनाथ से पहले मौका दे दिया गया. इससे दुखी होकर बद्रीनाथ ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मुझे कम से कम एक मौका तो दो ताकि मैं खुद को साबित कर सकूं. अगर मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्लॉप हो गया, तो कभी शिकायत नहीं करूंगा, लेकिन मैं एक मौका पाने का हकदार जरूर हूं."
7. आखिरकार मिला भारत के लिए खेलने का मौका
चयनकर्ताओं ने आखिरकार उनकी बात सुनी. उसी श्रीलंका दौरे पर जब सचिन तेंदुलकर चोटिल हुए, तो बद्रीनाथ को वनडे टीम में शामिल किया गया. डंबुला की मुश्किल पिच पर अपने पहले ही वनडे मैच में उन्होंने 7वें नंबर पर आकर नाबाद 27 रन बनाए और भारत को 3 विकेट से जीत दिलाई. हालांकि, अगले दो मैचों में वह खास प्रदर्शन नहीं कर सके और फिर तीन साल तक उन्हें वनडे टीम में मौका नहीं मिला.
8. टेस्ट करियर की शुरुआत
फरवरी 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में बद्रीनाथ ने अपना टेस्ट डेब्यू किया. अपनी पहली ही पारी में उन्होंने 56 रन बनाए. घरेलू क्रिकेट में लगभग 59 का शानदार औसत रखने के बावजूद बद्रीनाथ भारत के लिए सिर्फ 2 ही टेस्ट मैच खेल पाए.
9. चेन्नई सुपर किंग्स के 'मिस्टर डिपेंडेबल'
2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही बद्रीनाथ लगातार 6 सीजन तक चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का हिस्सा रहे. वह टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक थे. जब भी टीम मुसीबत में होती, बद्रीनाथ पारी को संभाल लेते थे. इसी वजह से उन्हें 'मिस्टर डिपेंडेबल' कहा जाता था. CSK के साथ उन्होंने दो आईपीएल और एक चैंपियंस लीग टी-20 का खिताब भी जीता.
10. विदर्भ और आरसीबी का सफर
कई सालों तक तमिलनाडु के लिए खेलने के बाद 2014-15 के घरेलू सीजन में बद्रीनाथ विदर्भ की टीम से जुड़ गए और टीम की कप्तानी संभाली. 2015 के आईपीएल सीजन में उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने खरीदा था, हालांकि उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला.
11. अपनी पुरानी टीम तमिलनाडु के खिलाफ मुकाबला
फरवरी 2015 में रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल मैच में बद्रीनाथ अपनी पुरानी टीम तमिलनाडु के खिलाफ विदर्भ की कप्तानी कर रहे थे. यह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी की बढ़त के आधार पर तमिलनाडु आगे निकल गई. इस मैच में बद्रीनाथ ने 40 और 0 रन बनाए थे.