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सुंदरवन का शहद क्यों है इतना खास? मधुमक्खियों से लेकर रॉयल बंगाल टाइगर तक जानिए पूरी कहानी

Sundarbans Honey: सुंदरवन के जंगलों में शहद इकट्ठा करने वाले मौली समुदाय के लिए शहद संग्रह सिर्फ रोजी-रोटी नहीं, बल्कि पीढ़ियों पुरानी परंपरा है. हर साल ये लोग जंगल में जाकर विशाल मधुमक्खियों के छत्तों से शहद निकालते हैं, लेकिन इस काम के दौरान उन्हें रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ और जंगल के दूसरे खतरों का सामना करना पड़ता है. जंगल में जाने से पहले बोनबिबी की पूजा से लेकर कई दिनों तक नाव में रहकर शहद जुटाने तक, इस काम से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अपने आप में बेहद जोखिम भरी है. सुंदरवन का मल्टीफ्लोरल मैंग्रोव हनी इसी मेहनत और प्राकृतिक विविधता की वजह से खास माना जाता है.

Last Updated: September 29, 2026 | 4:58 PM IST
The fear of death behind every drop of honey - Photo Gallery
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शहद की हर बूंद के पीछे मौत का डर

पश्चिम बंगाल के सुंदरवन में शहद इकट्ठा करने वाले लोगों की जिंदगी किसी रोमांचक फिल्म की कहानी जैसी लग सकती है. पेड़ों पर लटके विशाल मधुमक्खियों के छत्ते, हाथ में धारदार औजार और नीचे मैंग्रोव के जंगल में छिपा रॉयल बंगाल टाइगर—इन सबके बीच मौली यानी पारंपरिक शहद संग्रहकर्ता अपना काम करते हैं. जंगल में जाने का मतलब उनके लिए सिर्फ रोजी-रोटी कमाना नहीं, बल्कि हर बार जोखिम उठाना भी है.

Bonbibi is worshipped before going into the forest. - Photo Gallery
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जंगल में जाने से पहले बोनबिबी की पूजा

सुंदरवन में कदम रखने से पहले मौली बोनबिबी की पूजा करते हैं. स्थानीय लोकविश्वास में बोनबिबी को जंगल की रक्षक माना जाता है. हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोग इस परंपरा से जुड़े हैं. जंगल में बाघों और दूसरे खतरों से सुरक्षा की कामना के साथ प्रार्थना की जाती है. दक्षिण राय को भी बाघों से जुड़े शक्तिशाली देवता के रूप में माना जाता है. ऐसे में जंगल में जाने से पहले की यह पूजा उनके लिए आस्था के साथ-साथ हिम्मत जुटाने का जरिया भी है.

A farewell as if there is no return - Photo Gallery
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ऐसी विदाई, जैसे लौटकर आना तय न हो

मौली परिवारों की जिंदगी का सबसे भावुक पहलू जंगल जाने से पहले की विदाई से जुड़ा है. 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन में सुंदरवन के कुछ मौली परिवारों में ऐसी परंपराओं का उल्लेख किया गया था, जिनमें विदाई के दौरान शोक-काल जैसी रस्में निभाई जाती थीं. इनमें सिंदूर न लगाना, मेहमानों का स्वागत न करना, श्मशान न जाना और घर का दरवाजा खुला रखना जैसी बातें शामिल थीं. हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि ऐसी परंपरा आज भी सभी मौली परिवारों में प्रचलित है. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि जंगल से लौटकर आने को लेकर डर कितना गहरा रहा है.

Camp in the jungle for 10-15 days with luggage in a boat - Photo Gallery
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नाव में सामान लेकर 10-15 दिन जंगल में डेरा

हर साल शहद संग्रह के मौसम में मौली समूह बनाकर नाव से सुंदरवन के जंगलों में जाते हैं. यह कुछ घंटों का काम नहीं होता. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कई दल कई दिनों तक जंगल में रहते हैं और अपने साथ चावल, सब्जियां तथा जरूरत का सामान लेकर चलते हैं. पूरी टीम साथ रहती है और आम तौर पर एक अनुभवी व्यक्ति उसका नेतृत्व करता है. शहद और मधुमोम सुंदरवन के प्रमुख वन उत्पादों में शामिल हैं और इनके संग्रह के लिए अनुमति की जरूरत होती है.

Honey is extracted from the hive by smoking - Photo Gallery
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धुआं करके छत्ते से निकालते हैं शहद

जंगल में पहुंचने के बाद मौली पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते तलाशते हैं. विशालकाय मधुमक्खी यानी Apis dorsata के छत्ते सुंदरवन के शहद संग्रह में खास भूमिका रखते हैं. छत्ता मिलने पर पत्तियों या दूसरे पारंपरिक साधनों से धुआं किया जाता है, जिससे मधुमक्खियां कुछ दूरी पर चली जाएं. इसके बाद शहद से भरे हिस्से को काटकर निकाला जाता है. पारंपरिक संग्रह में छत्ते के अंडों और लार्वा वाले हिस्से को बचाने की कोशिश भी की जाती है, ताकि मधुमक्खियों की कॉलोनी दोबारा विकसित हो सके.

Beehive above, tiger lurking below - Photo Gallery
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ऊपर छत्ता, नीचे घात लगाए बैठा बाघ

मौली के लिए मधुमक्खियों से बचना ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं है. जब शहद संग्रहकर्ता पेड़ के ऊपर छत्ते पर ध्यान लगाए होते हैं, तब जमीन पर मौजूद बाघ का खतरा बना रहता है. सुंदरवन रॉयल बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है और जंगल के भीतर शहद संग्रह मानव-बाघ संघर्ष का जोखिम बढ़ाता है. WWF के अनुसार, सुंदरवन में हर साल करीब छह शहद संग्रहकर्ताओं की मौत मानव-बाघ संघर्ष से होने का अनुमान है; यह आधिकारिक संयुक्त सरकारी मृत्यु-रजिस्टर का आंकड़ा नहीं है. मगरमच्छ और ज्वारीय पानी भी अतिरिक्त खतरे पैदा करते हैं.

Sundarbans honey is made from several mangrove flowers. - Photo Gallery
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कई मैंग्रोव फूलों से बनता है सुंदरवन का शहद

सुंदरवन का शहद किसी एक फूल से तैयार नहीं होता. मधुमक्खियां मैंग्रोव जंगल में मौजूद अलग-अलग पेड़ों के फूलों से रस इकट्ठा करती हैं. सुंदरी, गरान, गेवां, खलिसा और केओरा जैसे पेड़ों के फूल इस शहद की खासियत से जुड़े हैं. इसलिए इसे मल्टीफ्लोरल मैंग्रोव हनी कहा जाता है. सुंदरवन के शहद को भौगोलिक पहचान यानी GI रजिस्ट्रेशन भी मिला है, जिससे इस उत्पाद का क्षेत्रीय महत्व दर्ज होता है.

The hard work of generations in a drop of honey - Photo Gallery
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शहद की एक बूंद में पीढ़ियों की मेहनत

सुंदरवन का शहद सिर्फ एक खाद्य उत्पाद नहीं है. इसके पीछे मौली समुदाय की पीढ़ियों पुरानी परंपरा, जंगल का अनुभव और जोखिम भरी मेहनत जुड़ी है. सरकारी व्यवस्था के तहत अनुमति लेकर शहद संग्रह किया जाता है और तय प्रक्रिया के बाद इसे बाजार तक पहुंचाया जाता है. पश्चिम बंगाल वन विकास निगम इसे MOUBAN ब्रांड के नाम से भी बेचता है. दूसरी ओर, सुरक्षित तरीके से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की कोशिशें भी हुई हैं, ताकि लोगों को बाघों के क्षेत्र में जाकर शहद इकट्ठा करने के जोखिम से बचाया जा सके.

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