Chhattisgarh Crime News: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में दो भाइयों पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी पिता-पुत्र को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई है. पिछले साल दोषियों ने दशगात्र कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद में तलवार से दो भाइयों पर जानलेवा हमला किया था.
छत्तीसगढ़ में कोर्ट ने तलवार से हमला करने वाले पिता-पुत्र को 10 साल की सजा सुनाई.
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले में दो भाइयों पर तलवार से जानलेवा हमला करने वाले पिता-पुत्र को कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है. द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश पेंड्रारोड ज्योति अग्रवाल ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता सेवा सिंह धुर्वे और पुत्र गोविंद सिंह धुर्वे को 10-10 साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है. इस मामले में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह द्वारा की गई, जिन्होंने ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
घटनाक्रम के अनुसार, 18 जून 2025 की रात ग्राम टीकरकला में एक दशगात्र कार्यक्रम के दौरान विवाद हुआ था. प्रार्थी सौरभ भट्ट जब अपने भाई संदीप भट्ट को लेने वहां पहुंचा, तब आरोपी गोविंद धुर्वे पुराने विवाद को लेकर गाली-गलौज करने लगा. विवाद बढ़ने पर गोविंद अपने पिता सेवा सिंह धुर्वे को बुला लाया, जो अपने साथ धारदार तलवार लेकर आया था. दोनों ने मिलकर संदीप भट्ट पर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया. जब संदीप ने अपना बचाव करने की कोशिश की, तो तलवार के वार से उसके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं. बीच-बचाव करने आए सौरभ भट्ट के साथ भी आरोपियों ने मारपीट की.
प्रत्यक्षदर्शियों के हस्तक्षेप के कारण दोनों भाइयों की जान बच सकी. बाद में दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया. मामले की सुनवाई के दौरान द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने पाया कि आरोपियों ने न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि प्रतिबंधित हथियार का अवैध रूप से उपयोग भी किया. साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद, कोर्ट ने दोनों पिता पुत्र आरोपियों को बीएनएस एक्ट की धारा 109, 3(5), के तहत 10 साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपया का अर्थदंड तथा धारा 118, 3(5) के तहत छह महीने के सश्रम कारावास और 500 अर्थदंड की सजा सुनाई है.
साथ ही आयुध अधिनियम के तहत पिता सेवा सिंह को धारा 25 (1- क) और 27(2) के तहत दोषी करार दिया और 7 साल के सश्रम कारावास और ₹1000 के अर्थदंड की सजा सुनाई. सजा सुनाते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समाज में इस तरह के हिंसक कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है. फैसले के बाद दोनों दोषियों को जेल वारंट तैयार कर सजा भुगतने हेतु जिला जेल पेंड्रारोड भेज दिया गया है.
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