मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को घोषणा की कि दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए छात्रावास सुविधाओं के निर्माण की योजना शुरू कर दी है. इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय राजधानी आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और किफायती आवास की उपलब्धता को बढ़ाना है.
बता दें कि यह निर्णय सत्य निकेतन में एक पीजी भवन के ढहने से सात छात्रों की मौत के कुछ दिनों बाद आया है. प्रस्तावित छात्रावासों में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नामांकित छात्र-छात्राओं दोनों के रहने की व्यवस्था होगी.
वीडियो संदेश में की घोषणा
मुख्यमंत्री ने वीडियो जारी कर इस घोषणा की जानकारी दी है. गुप्ता ने एक वीडियो संदेश में कहा, “अगर हम दिल्ली को एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में देखते हैं, तो हमें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ छात्रावासों की आवश्यकता को भी पूरा करना होगा.”
रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार ने निर्माण कार्य करने में सक्षम विभागों के साथ पहले ही चर्चा कर ली है, उपयुक्त स्थलों की पहचान कर ली है और उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और सुख-सुविधाओं को लेकर एक नीति तैयार करने का काम शुरू कर दिया है. उन्होंने आगे कहा, “हमने छात्रावासों के निर्माण में सक्षम विभिन्न विभागों के साथ बैठकें की हैं, उपयुक्त स्थानों की पहचान की है और एक ऐसी नीति का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है जो छात्रों की जरूरतों और इन छात्रावासों में प्रदान की जाने वाली सुविधाओं को संबोधित करती है. देश भर के विभिन्न राज्यों से आने वाले छात्रों के माता-पिता अपने बच्चों को पूरी तरह से निश्चिंत होकर छोड़ सकते हैं.” उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि छात्रों और उनके परिवारों को अपनी पढ़ाई के दौरान आवास, भोजन और सुरक्षा के बारे में चिंता न करनी पड़े.
सत्य निकेतन त्रासदी
यह घोषणा दिल्ली में छात्र आवास की नए सिरे से जांच के बीच आई है, जो हाल ही में सत्य निकेतन में निजी पे-गेस्ट आवास के रूप में इस्तेमाल की जा रही एक इमारत के ढहने के बाद हुई है , जिसमें सात छात्रों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद छात्रों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों और संस्थागत छात्रावासों की अधिक उपलब्धता की मांग उठी, जिनमें से कई छात्र सीमित छात्रावास क्षमता के कारण निजी पीजी, किराए के कमरों और साझा आवास पर निर्भर हैं.