विधानसभा अध्यक्ष एवं घरौंडा विधायक हरविन्दर कल्याण ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है, इसके लिए आज से ही हमारे युवाओं में वो कौशल, मेहनत और सूझबूझ विकसित करने की जरूरत है जिससे वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो पाएं।
प्रवीण वालिया-करनाल India News (इंडिया न्यूज), Vidhan Sabha Speaker Harvinder Kalyan : विधानसभा अध्यक्ष एवं घरौंडा विधायक हरविन्दर कल्याण ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है, इसके लिए आज से ही हमारे युवाओं में वो कौशल, मेहनत और सूझबूझ विकसित करने की जरूरत है जिससे वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो पाएं।
विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण कोड कोशेंट स्कूल ऑफ टेक्नॉलॉजी के दस वर्ष पूरे होने पर ए डिकेड ऑफ इम्पैक्ट समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस दौरान भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय सोनीपत की कुलपति प्रो. डॉ. सुदेश छीकरा व नगर निगम गुडग़ांव के अतिरिक्त आयुक्त यश जालुका विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। आयोजन में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने भाग लिया।
विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो विकसित भारत 2047 का लक्ष्य रखा है उसके लिए देश व प्रदेश के युवाओं के भविष्य की तैयारी भी बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समारोह इस बात का प्रमाण है कि मूल्य-आधारित और उद्देश्यपूर्ण नवाचार धरातल पर शुरू होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जमीनी ऊर्जा और उद्यमशीलता की भावना का प्रतीक हैं, जो भारत को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर करेंगे।
उन्होंंने कहा कि मेरा राजनीति में आने का सफर भी एक स्टार्टअप की तरह था। मेरा मकसद समाज से जुड़कर, समाज के लिए कुछ अलग, कुछ हटकर करने का था। यही भावना इस संस्थान के काम में भी दिखाई देती है। नगर निगम गुडग़ांव के अतिरिक्त आयुक्त यश जालुका ने कहा कि भारत एआई की क्रांति में आगे अवश्य बढ़ रहा है। प्रारंभिक शिक्षा में छात्रों को एआई से परिचित कराना न केवल अनिवार्य है, बल्कि यह उनके सोचने की क्षमता, गति व रचनात्मकता को भी बढ़ावा देगा।
उन्होंने भारत के भविष्य को आकार देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर जोर देते हुए इसे स्कूल स्तर से शुरू करने का आह्वान किया। कोड कोशेंट स्कूल ऑफ टेक्नॉलॉजी के संस्थापक अरुण गोयत ने कहा कि भारत का भविष्य उसके छोटे-छोटे शहरों और गांवों से निकलने वाले बड़े विचारों पर आधारित होगा जब उद्देश्य, नीति और लोग मिलकर काम करेंगे, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।
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