Madhya Pradesh UCC Bill : मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी. बिल पास होने के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब सभी नागरिक समान हैं, तो उनसे जुड़े कानून भी समान होने चाहिए. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य पारिवारिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है.
क्या है UCC बिल में खास?
मध्य प्रदेश सरकार के मुताबिक यह विधेयक रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर तैयार किया गया है. समिति को लाखों सुझाव प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर बिल का मसौदा तैयार किया गया.इस कानून में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और सरोगेसी जैसे पारिवारिक मामलों के लिए सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू करने का प्रावधान किया गया है. साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने और आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी से जन्मे बच्चों को कानूनी मान्यता देने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.
दूसरे राज्यों से कैसे अलग है मध्य प्रदेश का कानून?
देश में सबसे पहले उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू की थी. इसके बाद गुजरात और असम ने भी अपने-अपने स्तर पर ऐसे कानून लागू किए. अब मध्य प्रदेश इस दिशा में आगे बढ़ने वाला नया राज्य बन गया है.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में कुछ प्रावधानों में अंतर देखने को मिलता है. उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया था. असम ने भी इसी मॉडल को अपनाया, जबकि गुजरात में पंजीकरण से जुड़े नियम अपेक्षाकृत अधिक सख्त हैं.
उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में क्या होगा बदलाव?
नए कानून के तहत संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में पति, पत्नी, बेटा और बेटी को समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है. हालांकि, यदि किसी व्यक्ति ने पहले से वैध वसीयत बनाई है, तो उस स्थिति में वसीयत के अनुसार ही फैसला होगा. बिना वसीयत वाले मामलों में UCC के प्रावधान लागू होंगे.
सीएम मोहन यादव ने क्या कहा?
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने के सिद्धांत पर काम कर रही है. उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है.