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MP News: रीवा रेलवे स्टेशन की लिफ्ट बनी कालकोठरी, तीन घंटे तक कैद रहीं मासूम जिंदगियां, जानें- पूरा मामला

Rewa News: रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगी लिफ्ट अचानक बंद होने से उसमें मौजूद यात्रियों के लिए वे तीन घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं थे. बंद दरवाजे, घुटन भरी हवा और बाहर निकलने की अनिश्चितता ने अंदर फंसे लोगों की घबराहट बढ़ा दी थी.

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Last Updated: May 6, 2026 21:16:25 IST

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MP Latest News: रीवा रेलवे स्टेशन, जहां हर दिन हजारों यात्री अपनी मंजिलों की ओर कदम बढ़ाते हैं, वहां हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्थाओं और दावों की पोल खोल कर रख दी. यात्रियों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बीच में ही अटक गई, जिसमें कई यात्री करीब तीन घंटे तक कैद रहे.

रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगी लिफ्ट अचानक बंद होने से उसमें मौजूद यात्रियों के लिए वे तीन घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं थे. बंद दरवाजे, घुटन भरी हवा और बाहर निकलने की अनिश्चितता ने अंदर फंसे लोगों की घबराहट बढ़ा दी थी. लिफ्ट के भीतर फंसे लोग मदद के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने में लंबा समय लग गया.

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी पर भी बड़े सवाल खड़े करती है. अक्सर देखा जाता है कि स्टेशनों पर आधुनिक मशीनें तो लगा दी जाती हैं, लेकिन उनकी नियमित सर्विसिंग और आपातकालीन स्थिति से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं होते. यात्रियों के लिए सहूलियत के तौर पर बनाई गई यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गई.

मुश्किल घड़ी और बचाव कार्य

लिफ्ट के भीतर फंसे यात्रियों ने बताया कि उन्हें हर मिनट भारी पड़ रहा था. बाहर की दुनिया अपनी रफ्तार से चल रही थी, लेकिन लिफ्ट के अंदर समय जैसे ठहर गया था. यात्रियों के पास वेंटिलेशन की कमी थी और वे एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और तकनीकी टीम के पहुंचने के बाद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हालांकि, बाहर निकलने के बाद भी उनके चेहरों पर वह खौफ साफ देखा जा सकता था.

रीवा रेलवे स्टेशन की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है. रेलवे अक्सर तकनीकी समस्या का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन यह मामला सीधे तौर पर यात्रियों की जान और सुरक्षा से जुड़ा है. क्या स्टेशनों पर लगी लिफ्टों की नियमित जांच होती है? आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए कोई अलार्म सिस्टम या स्टाफ वहां तैनात क्यों नहीं था.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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MP Latest News: रीवा रेलवे स्टेशन, जहां हर दिन हजारों यात्री अपनी मंजिलों की ओर कदम बढ़ाते हैं, वहां हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्थाओं और दावों की पोल खोल कर रख दी. यात्रियों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बीच में ही अटक गई, जिसमें कई यात्री करीब तीन घंटे तक कैद रहे.

रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगी लिफ्ट अचानक बंद होने से उसमें मौजूद यात्रियों के लिए वे तीन घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं थे. बंद दरवाजे, घुटन भरी हवा और बाहर निकलने की अनिश्चितता ने अंदर फंसे लोगों की घबराहट बढ़ा दी थी. लिफ्ट के भीतर फंसे लोग मदद के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने में लंबा समय लग गया.

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी पर भी बड़े सवाल खड़े करती है. अक्सर देखा जाता है कि स्टेशनों पर आधुनिक मशीनें तो लगा दी जाती हैं, लेकिन उनकी नियमित सर्विसिंग और आपातकालीन स्थिति से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं होते. यात्रियों के लिए सहूलियत के तौर पर बनाई गई यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गई.

मुश्किल घड़ी और बचाव कार्य

लिफ्ट के भीतर फंसे यात्रियों ने बताया कि उन्हें हर मिनट भारी पड़ रहा था. बाहर की दुनिया अपनी रफ्तार से चल रही थी, लेकिन लिफ्ट के अंदर समय जैसे ठहर गया था. यात्रियों के पास वेंटिलेशन की कमी थी और वे एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और तकनीकी टीम के पहुंचने के बाद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हालांकि, बाहर निकलने के बाद भी उनके चेहरों पर वह खौफ साफ देखा जा सकता था.

रीवा रेलवे स्टेशन की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है. रेलवे अक्सर तकनीकी समस्या का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन यह मामला सीधे तौर पर यात्रियों की जान और सुरक्षा से जुड़ा है. क्या स्टेशनों पर लगी लिफ्टों की नियमित जांच होती है? आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए कोई अलार्म सिस्टम या स्टाफ वहां तैनात क्यों नहीं था.

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