Punjab Government CBI investigation: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर सियासी और कानूनी घमासान बढ़ गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने और दो महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। अब भगवंत मान सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और 6 अक्टूबर की तड़के करीब 1:42 बजे स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की। पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामला ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े आरोपों और राज्य के संघीय ढांचे से जुड़ा है तथा विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे मामलों को लेकर चिंता है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को लिस्ट किया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मान सरकार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को जांच में केंद्रीय एजेंसी को पूरा सहयोग देने को कहा गया। अब पंजाब सरकार ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य की SLP सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर 62464/2026 के तहत दाखिल की गई है और फिलहाल यह लंबित है।
तड़के 1:42 बजे दाखिल हुई SLP, तत्काल सुनवाई की मांग
पंजाब सरकार ने मंगलवार की शुरुआत में ही हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी। राज्य की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि आरोप ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे राज्य सरकार के प्रशासनिक मामलों से जुड़े हैं और चुनाव नजदीक होने के कारण इसे राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे संघीय ढांचे से जुड़ा मामला बताया और कहा कि इसी वजह से तत्काल सुनवाई जरूरी है। CJI सूर्यकांत ने तत्काल मंगलवार को सुनवाई करने के बजाय कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को लिस्ट किया जाएगा।
OSD राजबीर सिंह घुमन का नाम, ED ने भेजे थे तीन पत्र
पूरा मामला पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुमन और उनसे कथित रूप से जुड़े लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से शुरू हुआ। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने पंजाब के DGP को तीन पत्र भेजकर मामले में FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की थी। ED के मुताबिक, नितिन गोहल नाम का एक व्यक्ति सरकारी कामकाज में फायदा चाहने वाले लोगों और OSD राजबीर सिंह घुमन के बीच कथित बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। आरोपों में सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्रभावित करना, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस से जुड़े काम और दूसरे सरकारी लाभ दिलाने जैसी बातें शामिल हैं। घुमन और गोहल ने आरोपों से इनकार किया है।
‘कैश फॉर ट्रांसफर’ से लेकर टेंडर तक के आरोप
ED की ओर से सामने रखी गई जानकारी में कथित तौर पर ‘कैश फॉर ट्रांसफर’, पसंदीदा नीतियों के लिए पैसे और टेंडर से जुड़े लाभ जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र है। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग, CLU यानी Change of Land Use से जुड़े मामलों और दूसरे प्रशासनिक फैसलों में कथित हस्तक्षेप के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उसके सामने रखी गई सामग्री से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध होने के संकेत मिलते हैं और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच जरूरी है। अदालत ने पंजाब पुलिस के रवैये पर भी असंतोष जताया और कहा कि ED की ओर से जानकारी दिए जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
PIL दाखिल करने वाले वकील निखिल सराफ ने आरोप लगाया था कि ED की ओर से पंजाब पुलिस को जानकारी दिए जाने के बावजूद राज्य पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने भी कहा कि राज्य पुलिस की तरफ से जिस तरह मामले को संभाला गया, उससे वह संतुष्ट नहीं है। अदालत के मुताबिक, ED की ओर से भेजी गई सामग्री प्रथम दृष्टया उच्च सार्वजनिक पदों से जुड़े लोगों की कथित संलिप्तता की ओर इशारा करती है। इसी आधार पर अदालत ने CBI को जांच सौंपने का फैसला किया।
किसने दायर की थी PIL?
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकील निखिल सराफ की जनहित याचिका से पहुंचा था। याचिका में ED की ओर से पंजाब DGP को भेजे गए पत्रों के आधार पर स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर, सरकारी मंजूरियों और दूसरे कामों में कथित तौर पर प्रभाव और पैसों के लेन-देन का नेटवर्क चल रहा था। हाईकोर्ट ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI जांच का आदेश दिया।चुनाव से पहले मामला और गरमाया.