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राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ी; इस तारीख तक मिली राहत

Asaram Bail Extension: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने आसाराम की अंतरिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. उनकी जमानत की अवधि 6 मई 2026 को खत्म होने वाली थी, जिसे बढ़ा कर कोर्ट ने 25 मई 2026 कर दी है. आसाराम ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी.

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Last Updated: April 29, 2026 22:54:16 IST

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Asaram Interim Bail Extension: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने आसाराम की अंतरिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. उनकी जमानत की अवधि 6 मई 2026 को खत्म होने वाली थी, जिसे बढ़ा कर कोर्ट ने 25 मई 2026 कर दी है. आसाराम ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी.
 
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि मेडिकल आधार पर आसाराम की जमानत 25 मई तक बढ़ा दी जाए.
 

आसाराम का मेडिकल इलाज चल रहा है

आसाराम की ओर से बहस करते हुए, उनके वकील यशपाल राजपुरोहित ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उन्होंने कहा कि आसाराम का मेडिकल इलाज अभी चल रहा है. इन परिस्थितियों में, जमानत की अवधि तब तक बढ़ाई जानी चाहिए जब तक उनका इलाज पूरा नहीं हो जाता.
 

राजस्थान हाई कोर्ट ने पिछले साल जमानत दी थी

राजस्थान हाई कोर्ट (जोधपुर) ने 29 अक्टूबर, 2025 को आसाराम को ज़मानत दी थी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था.
 
यह याचिका मेडिकल आधार पर दायर की गई थी. यह पहला मौका था जब राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को ज़मानत दी थी. इससे पहले, 30 अगस्त, 2025 को उनकी अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था. यह गौरतलब है कि आसाराम अप्रैल 2018 से एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं. जेल में लगभग 12 साल बिताने के बाद, उन्हें पहली बार 7 जनवरी, 2025 को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी.
 

6 महीने की अवधि के लिए ज़मानत दी गई

29 अक्टूबर, 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपनी सज़ा निलंबित करने और मेडिकल आधार पर ज़मानत देने की मांग की थी. दिल्ली के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने आसाराम की ओर से बहस की. अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) दीपक चौधरी ने राजस्थान सरकार की ओर से तर्क प्रस्तुत किए, जबकि वकील पी.सी. सोलंकी ने पीड़िता का प्रतिनिधित्व किया. सभी पक्षों को सुनने के बाद, बेंच ने छह महीने की अवधि के लिए जमानत मंज़ूर कर ली. इस जमानत की अवधि 6 मई, 2026 को समाप्त होनी थी.

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Asaram Interim Bail Extension: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने आसाराम की अंतरिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. उनकी जमानत की अवधि 6 मई 2026 को खत्म होने वाली थी, जिसे बढ़ा कर कोर्ट ने 25 मई 2026 कर दी है. आसाराम ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी.
 
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि मेडिकल आधार पर आसाराम की जमानत 25 मई तक बढ़ा दी जाए.
 

आसाराम का मेडिकल इलाज चल रहा है

आसाराम की ओर से बहस करते हुए, उनके वकील यशपाल राजपुरोहित ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उन्होंने कहा कि आसाराम का मेडिकल इलाज अभी चल रहा है. इन परिस्थितियों में, जमानत की अवधि तब तक बढ़ाई जानी चाहिए जब तक उनका इलाज पूरा नहीं हो जाता.
 

राजस्थान हाई कोर्ट ने पिछले साल जमानत दी थी

राजस्थान हाई कोर्ट (जोधपुर) ने 29 अक्टूबर, 2025 को आसाराम को ज़मानत दी थी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था.
 
यह याचिका मेडिकल आधार पर दायर की गई थी. यह पहला मौका था जब राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को ज़मानत दी थी. इससे पहले, 30 अगस्त, 2025 को उनकी अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था. यह गौरतलब है कि आसाराम अप्रैल 2018 से एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं. जेल में लगभग 12 साल बिताने के बाद, उन्हें पहली बार 7 जनवरी, 2025 को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी.
 

6 महीने की अवधि के लिए ज़मानत दी गई

29 अक्टूबर, 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपनी सज़ा निलंबित करने और मेडिकल आधार पर ज़मानत देने की मांग की थी. दिल्ली के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने आसाराम की ओर से बहस की. अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) दीपक चौधरी ने राजस्थान सरकार की ओर से तर्क प्रस्तुत किए, जबकि वकील पी.सी. सोलंकी ने पीड़िता का प्रतिनिधित्व किया. सभी पक्षों को सुनने के बाद, बेंच ने छह महीने की अवधि के लिए जमानत मंज़ूर कर ली. इस जमानत की अवधि 6 मई, 2026 को समाप्त होनी थी.

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