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सरकार की रणनीति का कमाल: नक्सलमुक्त होने के करीब पहुंचा बस्तर, ‘लाल आतंक’ से हो रहा आजाद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा अब नक्सली प्रभाव और घटनाओं से मुक्त घोषित किया जा चुका है. गृह राज्य मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी देते हुए कहा कि बस्तर और पूरा छत्तीसगढ़ ‘लाल आतंक’ के चंगुल से बाहर आ चुका है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद पर काबू पाने की दिशा में सरकार की रणनीति तेजी से असर दिखाने लगी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा अब नक्सली प्रभाव और घटनाओं से मुक्त घोषित किया जा चुका है.  

गृह राज्य मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी देते हुए कहा कि बस्तर और पूरा छत्तीसगढ़ ‘लाल आतंक’ के चंगुल से बाहर आ चुका है और अब विकास की ओर तेजी से बढ़ने की तैयारी है.

पुलिस सुरक्षा कैंपों की हुई स्थापना

नक्सली घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में लगभग 400 से अधिक पुलिस व सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिनमें ‘फॉरवर्ड बेस कैंप’ भी शामिल हैं. इन शिविरों ने दूर–दूर तक नक्सली गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों को सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभाई है. अब जब नक्सल प्रभाव काफी सीमा तक कम हो गया है, तो सरकार इन शिविरों के उपयोग को बदलने की योजना बना रही है.

गृह राज्य मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इन 400 से अधिक पुलिस कैंपों का उपयोग सुरक्षा के अलावा स्कूल, अस्पताल और अन्य विकास जरूरतों के लिए किया जाएगा. इन्हें ‘एकीकृत विकास केंद्र’ और धीरे‑धीरे जनसुविधा केंद्रों में बदलने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि जानलेवा नक्सल घर बनाए जाने वाले दूरस्थ इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएँ सुरक्षित तरीके से पहुँचाई जा सकें. कुछ कैंपों को थानों, स्कूलों, अस्पतालों और लघु वनउपज के संग्रह‑प्रसंस्करण केंद्रों में बदलने का लक्ष्य तय किया गया है.

कई नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

इस माहौल में नक्सली टॉप कमांडर पापा राव सहित कई नक्सलियों ने पुनर्वास योजना ‘पूना मार्ग’ के तहत आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और सत्तारूढ़ नेतृत्व ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की समयसीमा को गंभीरता से लेते हुए जांच, तकनीकी निगरानी और स्थानीय पुनर्वास नीति को जोड़कर एक समन्वित रणनीति अपनाई है.

वर्तमान में दांतेवाड़ा में 1, कांकर में 19, बीजापुर में 11, सुकमा में 5 और नारायणपुर में 2 नक्सली बचे हैं. इस पूरी प्रक्रिया से साफ है कि बस्तर अब नक्सली डर की जगह विकास और शांति-क्षेत्र के रूप में उभर रहा है. 

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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Shivangi Shukla

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