अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी अभिनीत फिल्म बागबां में जैसे उनके बच्चों ने अपने माता-पिता को अलग कर दिया था, वैसा ही कुछ बुलंदशहर के एक परिवार में हुआ. बुलंदशहर के सिकंदराबाद इलाके में पारिवारिक विवाद के चलते 75 वर्षीय व्यक्ति और उनकी 70 वर्षीय पत्नी चार बेटों के बावजूद अलग-अलग रह रहे हैं.
बताया जाता है कि दोनों पति-पत्नी के बीच इस बात को लेकर वर्षों से असहमति बनी हुई थी कि वे किन बेटों के साथ रहें, जिसके चलते अंततः परिवार दो हिस्सों में बंट गया. पिता ने अपने सबसे बड़े और सबसे छोटे बेटों के साथ रहने का फैसला किया, जबकि मां अपने दो मंझले बेटों के साथ रहने लगीं. बाद में जब महिला को इलाज और दैनिक खर्चों के लिए पैसों की जरूरत पड़ी, तो उन्होंने अपने पति से संपर्क किया और इस लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद को पुलिस की महिला संलय में ले गईं.
बेटों को लेकर हुए विवाद के चलते अलग-अलग रह रहे दंपति
खबरों के मुताबिक, बुजुर्ग दंपत्ति के चार बेटे थे, लेकिन किसके साथ रहना है, इस बात को लेकर उनके बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे. पिता अपने सबसे बड़े और सबसे छोटे बेटों को अपने साथ रखना चाहते थे, जबकि उनकी पत्नी अपने दो मंझले बेटों के साथ रहना चाहती थीं. उत्तर प्रदेश के इस परिवार में मतभेद कथित तौर पर गंभीर हो गए और कई बार मारपीट तक पहुंच गए, यहां तक कि मामला पुलिस स्टेशन तक भी पहुंच गया. अंततः पति अपनी पत्नी और दो मंझले बेटों से नाराज हो गया, उनसे मिलना बंद कर दिया और अपने बाकी दो बेटों के साथ अलग रहने लगा.
महिला ने स्वास्थ्य बिगड़ने पर पति से मांगी मदद
समय बीतने के साथ-साथ 70 वर्षीय सत्यवती की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती गईं. खबरों के अनुसार, उनके साथ रहने वाले दोनों बेटों के पास उनके इलाज और दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था, जिसके चलते उन्हें अपने पति से आर्थिक सहायता लेनी पड़ी. पति-पत्नी के अलग रहने के बावजूद, सत्यवती ने अपने पति से अपने इलाज और रहने-सहने के खर्चों में मदद करने की गुहार लगाई. इस मदद के लिए उन्होंने पुलिस की महिला प्रकोष्ठ से संपर्क किया और उत्तर प्रदेश के इस विवाद को फिर से अधिकारियों के समक्ष उठाया.
महिला प्रकोष्ठ ने परिवार को फिर से मिलाने का किया प्रयास
खबरों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद महिला प्रकोष्ठ ने दोनों बुजुर्ग पति-पत्नी को तलब किया. परामर्शदाताओं ने उन्हें अपने मतभेदों को समाप्त करके फिर से एक साथ रहने के लिए मनाने की कोशिश की. पुलिस ने लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के प्रयास में चारों बेटों और उनके माता-पिता को भी एक साथ लाया. हालांकि, वर्षों की कड़वाहट के कारण पति-पत्नी दोनों ही दोबारा साथ रहने के लिए अनिच्छुक थे, और परिवार के पुनर्मिलन पर कोई समझौता नहीं हो सका.
समझाने-बुझाने के बाद, बुजुर्ग पति सत्यवती को हर महीने 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने के लिए राजी हो गया. उसे पहले ही 15 दिनों के लिए 2,700 रुपये मिल चुके हैं, जबकि नियमित 5,000 रुपये का मासिक भुगतान अगले महीने से शुरू होगा.