उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात बिगड़ने लगे हैं. पिछले कुछ घंटों में हुई भारी बारिश के कारण गंगा, यमुना और अन्य सहायक नदियां उफान पर हैं. इसके चलते पूर्वी यूपी के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. प्रयागराज, गाज़ीपुर और कुशीनगर जैसे जिलों में पानी भर गया है, वहीं सुल्तानपुर और अमेठी में स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है.
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों को बेहद संवेदनशील बताते हुए लखनऊ, प्रयागराज, मुरादाबाद, बरेली, सुल्तानपुर और अमेठी सहित 18 जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है.
निचले इलाकों में भरा पानी, मंदिर तक पहुंचा गंगाजल
प्रयागराज के निचले इलाकों में बारिश का पानी घुस गया है. यहां गंगा का जलस्तर चेतावनी के निशान को पार कर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है. प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. रविवार सुबह गंगा के पानी से हनुमान जी का स्पर्श हुआ. इसके अलावा संगम क्षेत्र और आसपास के घाट पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जिससे तटीय इलाकों के मंदिरों में भी जलभराव हो गया है.
3 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही गंगा
गाज़ीपुर जिले में भी गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह 62.690 मीटर तक पहुंच गया है. नदी फिलहाल चेतावनी के निशान से 59 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, हालांकि यह खतरे के निशान से 41.5 सेंटीमीटर नीचे है. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पानी 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चढ़ रहा है, इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
नारायणी नदी के जलस्तर में थोड़ा सुधार
कुशीनगर में नारायणी नदी भी उफान पर है. आज सुबह 6 बजे नदी से 1,11,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि कल शाम को यह बहाव 1,85,000 क्यूसेक तक पहुंच गया था. फिलहाल पानी का स्तर थोड़ा घटने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है.
सुलतानपुर और अमेठी में स्कूल बंद
खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में एहतियाती कदम उठाए हैं. इसी क्रम में सुल्तानपुर और अमेठी में सोमवार को कक्षा 8 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है.
मंदाकिनी नदी का बढ़ा जलस्तर
चित्रकूट जिले में भी अलर्ट जारी है. मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है, जिससे रामघाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है. नदी अभी खतरे के निशान से थोड़ी नीचे है, लेकिन अगर और बारिश हुई तो जलस्तर तेजी से ऊपर आ सकता है. वहीं, कुछ हिस्सों से पानी उतरने के बाद सड़कों और रास्तों पर कीचड़ जमा हो गया है और नुकसान का असर दिखने लगा है.