Live TV
Search
Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > 8 साल बाद आया विवेक तिवारी ‘हत्याकांड’ का फैसला! परिवार नाखुश…, जानिए 2018 की उस रात क्या हुआ था?

8 साल बाद आया विवेक तिवारी ‘हत्याकांड’ का फैसला! परिवार नाखुश…, जानिए 2018 की उस रात क्या हुआ था?

Vivek Tiwari Murder Case: लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में 8 साल बाद कोर्ट का फैसला आ गया है. दोषी सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल की सजा सुनाई गई है, लेकिन कानून के नियम के मुताबिक उसे सिर्फ 2 साल और जेल में बिताने होंगे. जानिए 29 सितंबर 2018 की उस खौफनाक रात आखिर क्या हुआ था.

Written By:
Last Updated: September 21, 2026 19:14:53 IST

Mobile Ads 1x1

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित ऐपल (Apple) एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने पूर्व पुलिस सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सख्त जेल और 20,000 जुर्माने की सजा सुनाई है.

10 साल की सजा, लेकिन जेल में रहेंगे सिर्फ 2 साल!

अदालत के इस फैसले के बाद प्रशांत चौधरी को कुल 10 साल की सजा भुगतनी होगी. हालांकि, वह इस घटना के बाद से ही यानी पिछले 8 सालों से जेल में बंद है. कानून के नियम के अनुसार, ट्रायल के दौरान जेल में बिताया गया समय कुल सजा में से घटा दिया जाता है. इस वजह से प्रशांत को अब जेल में सिर्फ 2 साल और बिताने होंगे. वहीं दूसरी ओर, प्रशांत चौधरी के परिवार का कहना है कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

दूसरा सिपाही सबूतों के अभाव में बरी

अदालत ने मामले के दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया है. फैसला सुनते ही अदालत कक्ष में दोनों सिपाहियों की आंखों में आंसू आ गए.

पीड़ित परिवार फैसले से नाखुश, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

दूसरी तरफ, मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके भाई विष्णु ने अदालत के इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है. विष्णु शुक्ला ने कहा, ‘एक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी गलती से गोली कैसे चला सकता है? यह सीधे तौर पर हत्या का मामला है. हमें पूरा न्याय नहीं मिला है और हम इंसाफ पाने के लिए अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.’

क्या था पूरा मामला?

यह दर्दनाक घटना 29 सितंबर 2018 की रात लखनऊ के गोमती नगर इलाके की है. ऐपल कंपनी में कार्यरत विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से घर लौट रहे थे. गोमती नगर विस्तार की मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का इशारा किया. विवेक द्वारा कार न रोकने पर प्रशांत चौधरी ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी, जो सीधे विवेक को जा लगी. गोली लगने के बाद कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई. विवेक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

इस घटना के बाद प्रदेश भर में भारी गुस्सा देखा गया था, जिसके बाद दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर मामले की एसआईटी (SIT) जांच कराई गई थी. लगभग 8 साल चले लंबे ट्रायल के बाद अब इस मामले में निचली अदालत का फैसला आया है.

MORE NEWS

Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > 8 साल बाद आया विवेक तिवारी ‘हत्याकांड’ का फैसला! परिवार नाखुश…, जानिए 2018 की उस रात क्या हुआ था?

Written By:
Last Updated: September 21, 2026 19:14:53 IST

Mobile Ads 1x1

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित ऐपल (Apple) एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने पूर्व पुलिस सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सख्त जेल और 20,000 जुर्माने की सजा सुनाई है.

10 साल की सजा, लेकिन जेल में रहेंगे सिर्फ 2 साल!

अदालत के इस फैसले के बाद प्रशांत चौधरी को कुल 10 साल की सजा भुगतनी होगी. हालांकि, वह इस घटना के बाद से ही यानी पिछले 8 सालों से जेल में बंद है. कानून के नियम के अनुसार, ट्रायल के दौरान जेल में बिताया गया समय कुल सजा में से घटा दिया जाता है. इस वजह से प्रशांत को अब जेल में सिर्फ 2 साल और बिताने होंगे. वहीं दूसरी ओर, प्रशांत चौधरी के परिवार का कहना है कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.

दूसरा सिपाही सबूतों के अभाव में बरी

अदालत ने मामले के दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया है. फैसला सुनते ही अदालत कक्ष में दोनों सिपाहियों की आंखों में आंसू आ गए.

पीड़ित परिवार फैसले से नाखुश, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

दूसरी तरफ, मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके भाई विष्णु ने अदालत के इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है. विष्णु शुक्ला ने कहा, ‘एक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी गलती से गोली कैसे चला सकता है? यह सीधे तौर पर हत्या का मामला है. हमें पूरा न्याय नहीं मिला है और हम इंसाफ पाने के लिए अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.’

क्या था पूरा मामला?

यह दर्दनाक घटना 29 सितंबर 2018 की रात लखनऊ के गोमती नगर इलाके की है. ऐपल कंपनी में कार्यरत विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से घर लौट रहे थे. गोमती नगर विस्तार की मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का इशारा किया. विवेक द्वारा कार न रोकने पर प्रशांत चौधरी ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी, जो सीधे विवेक को जा लगी. गोली लगने के बाद कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई. विवेक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

इस घटना के बाद प्रदेश भर में भारी गुस्सा देखा गया था, जिसके बाद दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर मामले की एसआईटी (SIT) जांच कराई गई थी. लगभग 8 साल चले लंबे ट्रायल के बाद अब इस मामले में निचली अदालत का फैसला आया है.

MORE NEWS