Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव को लेकर टीएमसी और बीजेपी में अभी से तकरार होता हुआ दिखाई दे रहा है. दूसरी तरफ सीएए और एसआईआर की प्रक्रिया चालू है. ऐसे में आइए जानते हैं कि एसआईआर और सीएए से किसे नुकसान होगा और किसे लाभ मिलेगा?
बंगाल में एसआईआर और सीएए से चुनाव में किसे नुकसान होगा?
पश्चिम बंगाल चुनाव: बंगाल चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कसनी शुरू कर दी है. लेकिन इस वक्त बंगाल में SIR और CAA का मुद्दा काफी गरमाया हुआ नजर आ रहा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और SIR के तहत जारी वोटर लिस्ट चर्चा में हैं. इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CAA के तहत नागरिकता देने के लिए दो और अधिकार प्राप्त कमेटियां बनाई हैं. दो कमेटियां पहले ही बन चुकी हैं. अब, कुल चार कमेटियों को नागरिकता के आवेदनों की जांच और उन्हें फाइनल करने का काम सौंपा जाएगा.
सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, इन कमेटियों को लंबित आवेदनों की जांच में तेजी लाने का काम सौंपा गया है, ताकि योग्य लोगों को जल्द से जल्द नागरिकता दी जा सके.
मतुआ समुदाय के बीच नागरिकता की स्थिति साफ करने और वोटिंग अधिकार की मांग जोर पकड़ रही है. एसआईआर के बाद जारी राज्य की फाइनल मतदाता सूचियों में करीब 65 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, इसके अलावा, बड़ी संख्या में वोटरों की स्थिति स्पष्ट नहीं है. जिसे पेंडिंग माना जा रहा है. जिसे कमेटी जांच करेगी, तभी कोई निर्णय लिया जाएगा. इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग का कहना है कि जिन लोगों की नागरिकता औपचारिक रूप से तय नहीं हुई है, उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल करना संभव नहीं है.
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने CAA को लेकर मौजूदा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने CAA का विरोध किया था. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो हर बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थी को नागरिकता मिल जाती. उन्होंने यह भी कहा कि अब चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है. बीजेपी सरकार हर बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थी को नागरिकता देगी.
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर CAA और SIR प्रोसेस को लेकर सवाल उठा रही हैं. उनका आरोप है कि इनका इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों को कमज़ोर करने के लिए किया जा रहा है.
बंगाल चुनाव से पहले सीएए और एसआईआर का मुद्दा उठाकर बीजेपी वोटों को ध्रुवीकरण करना चाहती है. जिससे सीधा-सीधा लाभ बीजेपी को होता हुआ दिखाई दे रहा है. लेकिन ममता बनर्जी भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है. जिस हिसाब से एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है. उससे टीएमसी को ही नुकसान होता नजर आ रहा है. हालांकि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. चुनाव नतीजे के बाद ही कुछ कहना सही होगी. अभी ये सारी बातें अटकलें ही हैं.
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