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HomeVideosकेदारनाथ में श्रद्धालु की मौत के बाद शव के लिए घंटों तड़पा बेटा, डीएम रुद्रप्रयाग पर लगे गंभीर आरोप, देखें वीडियो!

केदारनाथ में श्रद्धालु की मौत के बाद शव के लिए घंटों तड़पा बेटा, डीएम रुद्रप्रयाग पर लगे गंभीर आरोप, देखें वीडियो!

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Last Updated: 2026-04-23 09:14:56

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पहले ही दिन गुजरात से आए एक श्रद्धालु दिलीप भाई माली का हृदय गति रुकने से निधन हो गया, इस दुखद घड़ी में उनके बेटे हेमंत माली को प्रशासन से जिस सहानुभूति की उम्मीद थी, उसके विपरीत उन्हें कड़वा अनुभव मिला आरोप है कि रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा ने तकनीकी कारणों (DGCA NOC) का हवाला देकर शव को हेलीकॉप्टर से भेजने में असमर्थता जताई, जबकि उसी समय वे खुद हेलीकॉप्टर का उपयोग कर रहे थे, एक तरफ शोकाकुल बेटा मदद मांगता रहा और दूसरी तरफ अधिकारी उड़ गए, काफी जद्दोजहद के बाद दोपहर 12:30 बजे शव को नीचे ले जाया जा सका, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं.


Kedarnath Yatra 2026 Devotee Death Heart Attack: यह घटना केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं और अधिकारियों की संवेदनशीलता के बीच की खाई को उजागर करती है, पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सुरक्षा कारणों या एनओसी की कमी थी, तो वह नियम सरकारी चॉपर और अधिकारियों की उड़ानों पर लागू क्यों नहीं हुआ? आपदा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए तैनात प्रशासन का मुख्य दायित्व संकट में फंसे व्यक्ति की मदद करना होता है, बेटे को घंटों शव के साथ इंतजार कराना नैतिक रूप से गलत माना जा रहा है, इस पूरे मामले पर अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई ऐसा तर्क नहीं आया है जो इस भेदभाव को सही ठहरा सके, लोग मांग कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए, यात्रा के दौरान मौतें एक कड़वी हकीकत हैं, लेकिन शव के सम्मान और परिवार की सहायता में देरी अक्षम्य है.

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Last Updated: 2026-04-23 09:14:56


Kedarnath Yatra 2026 Devotee Death Heart Attack: यह घटना केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं और अधिकारियों की संवेदनशीलता के बीच की खाई को उजागर करती है, पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सुरक्षा कारणों या एनओसी की कमी थी, तो वह नियम सरकारी चॉपर और अधिकारियों की उड़ानों पर लागू क्यों नहीं हुआ? आपदा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए तैनात प्रशासन का मुख्य दायित्व संकट में फंसे व्यक्ति की मदद करना होता है, बेटे को घंटों शव के साथ इंतजार कराना नैतिक रूप से गलत माना जा रहा है, इस पूरे मामले पर अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई ऐसा तर्क नहीं आया है जो इस भेदभाव को सही ठहरा सके, लोग मांग कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए, यात्रा के दौरान मौतें एक कड़वी हकीकत हैं, लेकिन शव के सम्मान और परिवार की सहायता में देरी अक्षम्य है.

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