राष्ट्रपति भवन में अब ब्रिटिश यादों की जगह भारतीय नायकों की गूंज होगी, राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा 'राजाजी' की प्रतिमा का अनावरण केवल एक मूर्ति की स्थापना नहीं, बल्कि भारत के गौरव की पुनर्स्थापना है एडविन लुटियंस, जिन्होंने इस भवन को डिजाइन किया था, उनकी जगह अब भारत माता के सच्चे सपूत राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा मुस्कुराएगी, कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों ने इसे 'सांस्कृतिक आजादी' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आजाद भारत के प्रतीकों में अब विदेशी शासकों का नहीं, बल्कि उन लोगों का स्थान होगा जिन्होंने देश को गढ़ने में अपना जीवन समर्पित कर दिया, राजगोपालाचारी जी के परिवार की मौजूदगी ने इस पल को और भी भावुक और ऐतिहासिक बना दिया.
President Droupadi Murmu Rajaji Bust: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के ‘ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस’ (अशोक मंडप के पास) पर स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल, श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जी (राजाजी) (C. Rajagopalachari) की प्रतिमा का अनावरण किया, सबसे बड़ी और ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रतिमा को ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस (Edwin Lutyens) की प्रतिमा की जगह स्थापित किया गया है, यह कदम केंद्र सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत औपनिवेशिक मानसिकता गुलामी के प्रतीकों को खत्म कर भारतीय संस्कृति, विरासत और महान विभूतियों को सम्मान दिया जा रहा है, इस मौके पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जे.पी. नड्डा समेत कई दिग्गज मौजूद रहे, यह बदलाव ‘नए भारत’ की उस सोच को दर्शाता है जो अपनी जड़ों पर गर्व करना जानती है.
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