आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए टेक कंपनियां लगातार निवेश बढ़ा रही हैं. Google और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियां AI के लिए डेटा सेंटर, कंप्यूटर चिप्स और दूसरी तकनीकों पर भारी रकम खर्च कर रही हैं. इसी बीच दोनों कंपनियों ने अपने कुछ कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प भी दिया है. इससे सवाल उठ रहा है कि क्या AI में बढ़ता निवेश कंपनियों की भर्ती और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है?
Google ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में अपने कुछ कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का ऑफर बढ़ाया है. कंपनी ने इसकी जानकारी समाचार एजेंसी Reuters को दी है. Google ने बताया कि उसने 2025 में कुछ टीमों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए थे. इसके बाद इस साल जून में इन्हें दूसरे देशों तक बढ़ाया गयाहालांकि, इन ऑफर्स के तहत अब तक कितने कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने का फैसला किया है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
कर्मचारियों को क्या मिल रहा है ऑफर?
Google के इस कार्यक्रम के तहत पात्र कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ सकते हैं. इसके बदले उन्हें कंपनी की ओर से एकमुश्त आर्थिक सहायता या सेवरेंस पैकेज दिया जाता है.स्विट्जरलैंड में इस ऑफर को स्वीकार करने वाले कर्मचारियों को कथित तौर पर कंपनी में काम किए गए हर साल के बदले एक महीने की सैलरी मिली. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने की सैलरी रखी गई थी. दूसरे देशों में भी कर्मचारियों को यही पैकेज दिया जा रहा है, ऐसा मानना सही नहीं होगा.
Microsoft ने भी 26 अक्टूबर को अपने कुछ कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का कार्यक्रम घोषित किया था. यह ऑफर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और भारत में कंपनी के चुनिंदा विभागों के पात्र कर्मचारियों के लिए है.
Reuters के मुताबिक, Microsoft के करीब 60,000 कर्मचारी इस कार्यक्रम के लिए पात्र हो सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि इतने कर्मचारी नौकरी छोड़ने जा रहे हैं. यह केवल उन कर्मचारियों की संभावित संख्या है, जिन्हें ऑफर मिल सकता है.
AI पर कितना पैसा खर्च कर रही हैं कंपनियां?
Google की पैरेंट कंपनी Alphabet ने 2026 में पूंजीगत खर्च के लिए 195 अरब से 205 अरब डॉलर तक खर्च करने का अनुमान दिया है. यह पैसा मुख्य रूप से डेटा सेंटर, सर्वर, कंप्यूटर चिप्स और अन्य तकनीकी सुविधाओं पर लगाया जाएगा.कंपनी ने सितंबर तिमाही में ही इस तरह के निवेश पर 51.4 अरब डॉलर खर्च किए.
इस भारी निवेश का फायदा Google Cloud के कारोबार में दिखाई दे रहा है. सितंबर तिमाही में Google Cloud का रेवेन्यू 30.7 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 103 प्रतिशत ज्यादा है. इस दौरान उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी तीन गुना से अधिक बढ़कर 11.1 अरब डॉलर हो गया.
इससे पता चलता है कि कंपनियों के बीच Google की क्लाउड और AI सेवाओं की मांग बढ़ रही है. हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि AI पर किया गया पूरा निवेश कंपनी के लिए कितना मुनाफा कमाएगा.
क्या AI की वजह से जा रही हैं नौकरियां?
Google और Microsoft के स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने के ऑफर को देखकर ऐसा लग सकता है कि कंपनियां AI के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं. लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस बात की पूरी पुष्टि नहीं करते.
Alphabet में सितंबर के अंत तक 2,04,757 कर्मचारी थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 1,90,167 थी. यानी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.इसके अलावा, कंपनी का रिसर्च और डेवलपमेंट पर खर्च भी बढ़ा है. इसमें AI विशेषज्ञों को दिए जाने वाले ज्यादा वेतन का भी योगदान है.
इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या घटाते हुए दूसरी टीमों में भर्ती बढ़ा सकती हैं. AI के कारण कर्मचारियों के काम करने का तरीका और जरूरी स्किल्स बदल सकती हैं, लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि AI बड़े पैमाने पर नौकरियों की जगह ले चुका है.
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि AI पर खर्च की जा रही भारी रकम से कंपनियों को कितना फायदा मिलेगा.Google Cloud की बढ़ती कमाई एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन कंपनी के बढ़ते निवेश से निकट भविष्य में उसके कैश फ्लो पर दबाव भी पड़ सकता है.
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