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PF New Rule: क्या अब कम आएगी आपकी सैलरी? तनख्वाह 25000 से ज्यादा है? तो जान लीजिए PF के नए नियम

PF Wage Ceiling Hike: क्या आपकी भी बेसिक सैलरी 25,000 से ज्यादा है? जानिए PF वेज सीलिंग 15,000 से बढ़ाकर 25,000 होने के बाद आपकी टेक-होम सैलरी और रिटायरमेंट फंड पर इसका क्या असर पड़ेगा. समझें नए नियम बेहद आसान शब्दों में.

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Last Updated: September 22, 2026 16:52:20 IST

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हाल ही में सरकार ने प्रॉविडेंट फंड (PF) कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 प्रति माह कर दिया है. साल 2014 के बाद यह पहला बदलाव है. इस नए बदलाव से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ, पेंशन और मुफ्त जीवन बीमा योजनाओं के दायरे में आ गए हैं.

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित क्षेत्रों के करोड़ों कर्मचारियों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा देना है. हालांकि, पीएफ कटौतियां बढ़ने की वजह से टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाला वेतन) थोड़ी कम हो जाएगी.

पुराने और नए नियमों में अंतर

पुराना नियम: जब कोई कर्मचारी 15,000 प्रति माह से अधिक की बेसिक सैलरी पर नौकरी ज्वाइन करता था, तो उसके लिए पीएफ खाता खोलना अनिवार्य नहीं था.

नया नियम (अनिवार्य न्यूनतम योगदान):

पुराना योगदान (₹15,000 पर 12%) = ₹1,800 प्रति माह.

नया योगदान (₹25,000 पर 12%) = ₹3,000 प्रति माह.

कर्मचारी और कंपनी दोनों को 12% का योगदान देना होता है. 25,000 की नई सीमा के कारण, कर्मचारी के वेतन से अब 1,800 की जगह 3,000 कटेंगे, जिससे टेक-होम सैलरी में 1,200 की कमी आएगी.

अगर आपकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 है, तो क्या नियम लागू होगा?

नियम के मुताबिक, कंपनी कानूनी तौर पर केवल 25,000 की सीमा तक ही अपना 3,000 का हिस्सा देने के लिए बाध्य है. आइए इसे दो विकल्पों के जरिए समझते हैं:

विकल्प 1: केवल वैधानिक सीमा (Statutory Limit) पर पीएफ कटवाना.

अधिकतर निजी कंपनियां केवल अनिवार्य सीमा के हिसाब से ही पीएफ काटती हैं.

कर्मचारी का योगदान (12%): ₹25,000 का 12% यानी ₹3,000 प्रति माह.

कंपनी का योगदान (12% – कुल ₹3,000):

EPS (पेंशन फंड – 8.33%): ₹25,000 का 8.33% = ₹2,083 प्रति माह.

EPF (प्रॉविडेंट फंड – 3.67%): ₹917 प्रति माह.

इस स्थिति में, यदि आपकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 भी है, तब भी आपके वेतन से केवल ₹3,000 ही कटेंगे.

विकल्प 2: पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ कटवाना (जैसे ₹40,000 पर).

अगर आप और आपकी कंपनी दोनों राजी हैं, तो आप अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ योगदान दे सकते हैं.

कर्मचारी का योगदान: ₹40,000 का 12% = ₹4,800 प्रति माह.

कंपनी का योगदान: कुल ₹4,800 प्रति माह.

EPS (पेंशन फंड): अधिकतम सीमा ₹25,000 पर ही तय रहेगी, यानी ₹2,083 प्रति माह (जब तक कि आपने उच्च पेंशन का विकल्प न चुना हो).

EPF (प्रॉविडेंट फंड): शेष बची पूरी राशि, यानी ₹2,717 प्रति माह.

इस विकल्प में आपके वेतन से हर महीने ₹4,800 कटेंगे और कंपनी भी इतना ही योगदान देगी, जिससे आपका रिटायरमेंट फंड तो बहुत बड़ा बनेगा, लेकिन आपकी इन-हैंड (हाथ में आने वाली) सैलरी कम हो जाएगी.

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हाल ही में सरकार ने प्रॉविडेंट फंड (PF) कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 प्रति माह कर दिया है. साल 2014 के बाद यह पहला बदलाव है. इस नए बदलाव से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ, पेंशन और मुफ्त जीवन बीमा योजनाओं के दायरे में आ गए हैं.

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित क्षेत्रों के करोड़ों कर्मचारियों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा देना है. हालांकि, पीएफ कटौतियां बढ़ने की वजह से टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाला वेतन) थोड़ी कम हो जाएगी.

पुराने और नए नियमों में अंतर

पुराना नियम: जब कोई कर्मचारी 15,000 प्रति माह से अधिक की बेसिक सैलरी पर नौकरी ज्वाइन करता था, तो उसके लिए पीएफ खाता खोलना अनिवार्य नहीं था.

नया नियम (अनिवार्य न्यूनतम योगदान):

पुराना योगदान (₹15,000 पर 12%) = ₹1,800 प्रति माह.

नया योगदान (₹25,000 पर 12%) = ₹3,000 प्रति माह.

कर्मचारी और कंपनी दोनों को 12% का योगदान देना होता है. 25,000 की नई सीमा के कारण, कर्मचारी के वेतन से अब 1,800 की जगह 3,000 कटेंगे, जिससे टेक-होम सैलरी में 1,200 की कमी आएगी.

अगर आपकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 है, तो क्या नियम लागू होगा?

नियम के मुताबिक, कंपनी कानूनी तौर पर केवल 25,000 की सीमा तक ही अपना 3,000 का हिस्सा देने के लिए बाध्य है. आइए इसे दो विकल्पों के जरिए समझते हैं:

विकल्प 1: केवल वैधानिक सीमा (Statutory Limit) पर पीएफ कटवाना.

अधिकतर निजी कंपनियां केवल अनिवार्य सीमा के हिसाब से ही पीएफ काटती हैं.

कर्मचारी का योगदान (12%): ₹25,000 का 12% यानी ₹3,000 प्रति माह.

कंपनी का योगदान (12% – कुल ₹3,000):

EPS (पेंशन फंड – 8.33%): ₹25,000 का 8.33% = ₹2,083 प्रति माह.

EPF (प्रॉविडेंट फंड – 3.67%): ₹917 प्रति माह.

इस स्थिति में, यदि आपकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 भी है, तब भी आपके वेतन से केवल ₹3,000 ही कटेंगे.

विकल्प 2: पूरी बेसिक सैलरी पर पीएफ कटवाना (जैसे ₹40,000 पर).

अगर आप और आपकी कंपनी दोनों राजी हैं, तो आप अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ योगदान दे सकते हैं.

कर्मचारी का योगदान: ₹40,000 का 12% = ₹4,800 प्रति माह.

कंपनी का योगदान: कुल ₹4,800 प्रति माह.

EPS (पेंशन फंड): अधिकतम सीमा ₹25,000 पर ही तय रहेगी, यानी ₹2,083 प्रति माह (जब तक कि आपने उच्च पेंशन का विकल्प न चुना हो).

EPF (प्रॉविडेंट फंड): शेष बची पूरी राशि, यानी ₹2,717 प्रति माह.

इस विकल्प में आपके वेतन से हर महीने ₹4,800 कटेंगे और कंपनी भी इतना ही योगदान देगी, जिससे आपका रिटायरमेंट फंड तो बहुत बड़ा बनेगा, लेकिन आपकी इन-हैंड (हाथ में आने वाली) सैलरी कम हो जाएगी.

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