RBI Repo Rate Hike: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अपना बेंचमार्क रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% कर दिया. यह लगभग चार साल में पहली रेट बढ़ोतरी है, क्योंकि मज़बूत आर्थिक ग्रोथ के बावजूद महंगाई का दबाव बढ़ रहा है. MPC की तीन दिन की मीटिंग, जो 5 से 7 अक्टूबर तक हो रही है, अगस्त में रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर बिना बदलाव के रखने और महंगाई के आउटलुक और बदलते ग्रोथ-महंगाई डायनामिक्स पर ज़्यादा क्लैरिटी की ज़रूरत का हवाला देते हुए न्यूट्रल रुख बनाए रखने के बाद हो रही है.
क्या हो रहा है?
पिछली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी फरवरी 2023 में हुई थी, जब RBI ने रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.50 परसेंट कर दिया था. सेंट्रल बैंक ने 2025 में अपना रेट-कट साइकिल शुरू करने से पहले 2023-24 तक रेट में कोई बदलाव नहीं किया.
पॉलिसी रेपो रेट अभी 5.25 परसेंट
PTI पोल में ज़्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि बुधवार के पॉलिसी रिव्यू में 25 बेसिस पॉइंट रेट में बढ़ोतरी होगी और साथ ही कड़ा रुख भी रहेगा. हालांकि, इस बात पर राय बंटी हुई है कि क्या RBI भी अपना पॉलिसी रुख बदलेगा.ज़्यादातर एक्सपर्ट्स ने कहा कि रेट में बढ़ोतरी जल्द ही होगी, जबकि कुछ को लगा कि सेंट्रल बैंक आने वाले रिव्यू में बढ़ोतरी रोक सकता है.सरकार ने RBI को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित रिटेल महंगाई को 4 परसेंट पर रखने का आदेश दिया है, जिसमें दोनों तरफ 2 परसेंट पॉइंट का टॉलरेंस बैंड होगा. जुलाई में 4.45 परसेंट से अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82 परसेंट हो गई.
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर है जिस पर RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) देश के बैंकों को थोड़े समय के लिए पैसा उधार देता है.रेपो रेट बढ़ता है तब बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है. इसकी वजह से बैंक आमतौर पर लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं जिससे EMI बढ़ सकती है. वहीं अगर रेपो रेट घटता है तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो जाता है जिससे लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं, जिससे EMI घट सकती है.
RBI रेपो रेट क्यों बदलता है?
RBI मुख्य रूप से महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था में पैसे की उपलब्धता को प्रभावित करने के लिए रेपो रेट का इस्तेमाल करता है. अगर रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाता है, तो इसका मतलब है कि RBI ने बैंकों के लिए अपनी अल्पकालिक उधारी की लागत बढ़ा दी है. इसका असर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग-रेट लोन पर पड़ सकता है.