Smriti Mandhana podcast: एशिया कप फाइनल से पहले स्मृति मंधाना का वो दर्द, सवाल सुनते ही हो गईं भावुक… बोलीं- माफ कर सकती हूं, भूलती नहींभारतीय महिला क्रिकेट टीम रविवार, 13 सितंबर को श्रीलंका के खिलाफ महिला एशिया कप 2026 का फाइनल खेलने उतरेगी. दुबई में होने वाले इस खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम की नजर आठवीं बार ट्रॉफी जीतने पर है. टूर्नामेंट में अब तक भारत और श्रीलंका दोनों अजेय रहे हैं और ऐसे में फाइनल में स्मृति मंधाना के बल्ले से बड़ी पारी की उम्मीद भी की जा रही है. लेकिन इस बड़े मुकाबले से ठीक पहले स्मृति मंधाना का एक इंटरव्यू चर्चा में है. मैदान पर हमेशा शांत और संयमित नजर आने वाली स्मृति से जब उनकी जिंदगी की सबसे मुश्किल रात के बारे में पूछा गया तो वह कुछ पल के लिए भावुक हो गईं. इस दौरान उनके चेहरे पर दर्द साफ नजर आया. हालांकि, उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में विस्तार से बात करने के बजाय खुद को क्रिकेट तक सीमित रखा.
सबसे मुश्किल रात का सवाल आया तो कुछ पल के लिए चुप हो गईं स्मृति
हाल ही में एक पॉडकास्ट में स्मृति मंधाना से उनकी जिंदगी की सबसे कठिन रात के बारे में सवाल किया गया. सवाल सुनने के बाद वह कुछ देर के लिए चुप हो गईं और भावुक नजर आईं. उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को लेकर विस्तार से कुछ नहीं कहा और बातचीत को क्रिकेट की तरफ मोड़ दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मृति ने वर्ल्ड कप के दौरान के मुश्किल दौर और कोरोना महामारी के समय को अपनी जिंदगी के कठिन समय में शामिल किया. इस जवाब ने एक बार फिर यह दिखाया कि मैदान पर बेहद मजबूत और शांत नजर आने वाली क्रिकेटर के भीतर भी कई मुश्किल अनुभवों की यादें हैं.
निजी जिंदगी पर चुप्पी, क्रिकेट को बनाया अपनी ताकत
स्मृति मंधाना ने लंबे समय से अपनी निजी जिंदगी को लेकर सार्वजनिक चर्चा से दूरी बनाए रखी है. उनके निजी रिश्ते और शादी से जुड़ी खबरें सामने आने के बावजूद उन्होंने इस विषय पर विस्तार से बात नहीं की. इस इंटरव्यू में भी उन्होंने अपनी निजी जिंदगी की परतें खोलने के बजाय क्रिकेट पर ध्यान बनाए रखा. उनका यही रवैया उनके व्यक्तित्व का एक अलग पक्ष दिखाता है. वह अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने के बजाय अपने खेल पर फोकस करना पसंद करती हैं.
बाहर से शांत, अंदर बहुत गुस्सा
स्मृति ने बातचीत के दौरान यह भी स्वीकार किया कि भले ही लोगों को वह बाहर से शांत और सरल नजर आती हों, लेकिन उनके अंदर काफी गुस्सा है. हालांकि, वह इस गुस्से को किसी से बदला लेने के लिए इस्तेमाल करने में विश्वास नहीं रखतीं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें किसी की हमदर्दी की जरूरत नहीं है. वह नहीं चाहतीं कि कोई उन्हें कमजोर या बेचारी समझे. उनके जवाबों में यह साफ नजर आया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद वह खुद को मजबूत बनाए रखना चाहती हैं.
‘माफ कर सकती हूं, लेकिन भूलती नहीं’
जब स्मृति से पूछा गया कि क्या वह लोगों को आसानी से माफ कर देती हैं, तो उनका जवाब बेहद दमदार था. उन्होंने कहा कि वह माफ कर सकती हैं, लेकिन भूलती नहीं हैं. उनका यह जवाब उनके व्यक्तित्व के उस पहलू को सामने लाता है, जिसमें वह पुरानी बातों को लेकर किसी से उलझने के बजाय आगे बढ़ने में विश्वास रखती हैं. यानी किसी को माफ करना उनके लिए कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का तरीका है.
फाइनल में बल्ले से जवाब देने का मौका
अब स्मृति की नजर एक बार फिर मैदान पर है. श्रीलंका के खिलाफ एशिया कप फाइनल में भारतीय टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद होगी. टूर्नामेंट में स्मृति पहले ही शानदार फॉर्म दिखा चुकी हैं. हांगकांग, चीन के खिलाफ उन्होंने 124 रन की तूफानी पारी खेलकर कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए थे. भारत और श्रीलंका के बीच यह फाइनल इसलिए भी खास है क्योंकि 2024 के फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार महिला एशिया कप का खिताब जीता था. इस बार भारतीय टीम के पास उस हार का हिसाब बराबर करने और आठवीं बार ट्रॉफी अपने नाम करने का मौका है. ऐसे में फैंस की नजर सिर्फ ट्रॉफी पर ही नहीं, बल्कि स्मृति मंधाना के बल्ले पर भी होगी. मैदान के बाहर अपनी भावनाओं को अपने तक रखने वाली स्मृति अब मैदान पर बल्ले से जवाब देने उतरेंगी.