Shabnam murder case: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में शबनम हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है. परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में शबनम के साथ दोषी ठहराए गए सलीम को अपनी सबसे छोटी बहन की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की पैरोल मिली है. उसके गांव पहुंचने की खबर फैलते ही घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी. वहीं, पीड़ित परिवार ने पैरोल मिलने पर नाराजगी जताते हुए सजा में देरी पर सवाल उठाए हैं.
सलीम को देखने के लिए घर के बाहर जुटे लोग
सलीम के गांव पहुंचने की खबर के बाद कई लोग उसे देखने और मिलने के लिए उसके घर के बाहर पहुंचने लगे. इस घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. वर्दी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी निगरानी कर रहे हैं. महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई है. घर के मुख्य दरवाजे पर विशेष नजर रखी जा रही है और हर किसी को सलीम से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
शबनम की चाची फातमा ने जताई नाराजगी
शबनम की चाची फातमा ने सलीम को पैरोल मिलने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हत्याकांड में परिवार के सात लोगों की जान गई थी. ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बावजूद उस पर अमल क्यों नहीं हुआ. उन्होंने आशंका जताई कि अगर सलीम को पैरोल मिली है, तो भविष्य में शबनम को भी ऐसी राहत मिल सकती है. फातमा के मुताबिक, गांव के लोग सलीम को देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए यह घटनाक्रम पुराने जख्मों को फिर से ताजा करने जैसा है. उन्होंने कहा कि परिवार के मन में अब भी डर और नाराजगी है.
चाचा सत्तार ने भी उठाए सवाल
शबनम के चाचा सत्तार ने भी पैरोल पर असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि उनका परिवार गांव में सहज महसूस नहीं करता. सत्तार ने सवाल किया कि दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है. उन्होंने आशंका जताई कि सलीम किसी को प्रभावित करके जा सकता है. ये पीड़ित परिवार की आशंकाएं हैं; इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है.
स्कूल में भी दिखा चर्चा का असर
स्थानीय प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका मरियम ने बताया कि उस दिन सामान्य दिनों की तुलना में विद्यार्थियों की संख्या कम थी. उन्होंने संभावना जताई कि कुछ बच्चे सलीम को देखने गए होंगे. हालांकि, बच्चों की अनुपस्थिति की वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. सलीम को बहन की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की पैरोल मिली है. उसके घर के बाहर पुलिस निगरानी कर रही है, जबकि पीड़ित परिवार इस राहत पर सवाल उठा रहा है.