Gajkesari Yog On Akshay Tritiya 2026: इस साल 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी. इस बार अक्षय तृतीया पर कई शुभ योग बन रहे हैं. इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गज केसरी योग का निर्माण हो रहा है. इससे पहले 2025 में भी अक्षय तृतीया के लिए गज केसरी योग बना था. अब सवाल है कि आखिर कैसे होता है गज केसरी योग क्या है? इस बार कैसे हो रहा गज केसरी का निर्माण?
इस बार अक्षय तृतीया पर गज केसरी योग. जानिए कैसे होता है इसका निर्माण.
Gajkesari Yog On Akshay Tritiya 2026: हिन्दू धर्म में व्रत एवं त्योहारों का विशेष महत्व है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का दिन इसमें और भी पवित्र और खास है. बता दें कि, इस दिन हर साल अक्षय तृतीया मनाई जाती है. इस पवित्र दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जो भी शुभ और मांगलिक काम किए जाते हैं, उनका अक्षय पुण्य (जो कभी खत्म न हो) प्राप्त होता है. इस बार अक्षय तृतीया पर कई शुभ योग बन रहे हैं. इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गज केसरी योग का निर्माण हो रहा है. इससे पहले 2025 में भी अक्षय तृतीया के लिए गज केसरी योग बना था. इस बार अबूझ मुहूर्त होने से शुभ और मांगलिक काम को करने के लिए शुभ मुहूर्त देखने की कोई आवश्यकता नहीं होगी. इस दिन लोग सोना खरीदते हैं, नए काम शुरू करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. अब सवाल है कि आखिर कैसे होता है गज केसरी योग क्या है? इस बार कैसे हो रहा गज केसरी का निर्माण? इस बारे में India News को बता रहे गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-
ज्योतिष शास्त्र में गज केसरी योग बहुत ही शुभ और ताकतवर योग माना गया है. यह किसी भी जातक की कुंडली में हो तो वह कितना भी गरीब घर में पैदा हुआ हो फिर भी वह धनी हो सकता है. कुंडली में यह योग देवगुरु वृहस्पति और चंद्रमा से बनता है, कुंडली में गुरु और चंद्र दोनों ही पूर्णबली हो तो यह योग बनता है, कुण्डली में गजकेसरी योग होने पर धन दौलत, नाम, मान -सम्मान सब प्राप्त होता है.
इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी. इस साल ज्योतिष के लिहाज से भी अक्षय तृतीया बहुत ही खास होने वाली है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल अक्षय तृतीया पर गजकेसरी योग बनेगा. ज्योतिष में इसे राजयोग माना जाता है. कुंडली में गज केसरी योग गुरु और चंद्र से बनता है. अगर केंद्र स्थान यानी लग्न, चौथे और दसवें (1,4,10) भाव में गुरु-चंद्र साथ में हो और दोनों ग्रह बली हों तो यह योग बनता है. यदि इन ग्रहों की आपस में युति ना हो तब भी गज केसरी योग बन जाता है बशर्ते गुरु और चन्द्रमा दोनों बली हों और आपस में दृष्टि सम्बन्ध बना रहे हों. इस योग में भी सबसे बड़ा राजयोग जब फलित होगा जब गुरु अपनी उच्च राशि में चंद्रमा के साथ अथवा चंद्रमा भी उच्च राशि में गुरु के साथ हो. जैसे कर्क राशि में गुरु और चन्द्रमा बैठे हों अथवा वृषभ राशि में चन्द्रमा के साथ गुरु बैठे हों या दोनों में से कोई एक अपनी उच्च राशि में बैठकर दूसरे के साथ दृष्टि सम्बन्ध स्थापित कर रहे हों.
यदि अपनी उच्च राशि में बैठकर गुरु और चन्द्रमा आपस में सम्बन्ध बनाकर 4 या 10वें भाव में गज केसरी योग बना रहे हैं तब ऐसा जातक अपने जीवन में भवन, भूमि, वाहन, माता से सम्बंधित पूर्ण सुख प्राप्त करता है एवं व्यापार में बहुत ऊंचाइयां प्राप्त करता है. जिन जातकों की कुंडली में गज केसरी योग है उन्हें दूध में हल्दी अथवा केसर मिलाकर पीना चाहिए इससे उनकी कुंडली में यह योग सक्रिय बना रहता है और पूर्ण सुख प्राप्त होता है.
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