Holika Dahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लोग मिलकर होलिका जलाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से दुख, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाए. होलिका के दिन कई लकड़ियों का ढेर इकट्ठा कर आग लगाई जाती है. लेकिन, ज्योतिष शास्त्र में कुछ लकड़ियों का होली में दहन करना वर्जित बताया गया है. आइए जानते हैं इन लकड़ियों के बारे में-
जानिए, होलिका में किन पेड़ों की लकड़ियों को नहीं जलाना चाहिए. (Canva)
Holika Dahan 2026: ये सच है कि, भारत संस्कृति विविधताओं से भरा हुआ देश है. यहां परंपराओं ने संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है. इसलिए हर त्योहार को पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ मनाया जाता है. होली का त्योहार भी इनमें से एक है. जी हां, होली हिंदुओं के लिए सबसे खास त्योहारों में से एक है. माना जाता है कि, होलिका दहन के साथ सभी बुराइयों का नाश होता है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लोग मिलकर होलिका जलाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से दुख, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाए. होलिका के दिन कई लकड़ियों का ढेर इकट्ठा किया जाता है. इसके बाद लकड़ी के इस ढेर में आग लगाई जाती है. लेकिन, ज्योतिष शास्त्र में कुछ लकड़ियों का होली में दहन करना वर्जित बताया गया है. अब सवाल है कि आखिर इस बार होलिका दहन कब होगा? होलिका में किन पेड़ों की लकड़ियां नहीं लजाना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में-
आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. वहीं, होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को अर्धरात्रि में किया जाएगा. मान्यता है कि होलिका दहन के दिन जलाई गई अग्नि मन की नकारात्मक सोच जैसे गुस्सा, जलन और अहंकार को खत्म करता है. इसलिए होलिका दहन करते समय सही सामग्री का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी माना जाता है.
पीपल: बहुत पवित्र पेड़ माना जाता है, इसे जलाना अशुभ समझा जाता है.
शमी: पूजा में इस्तेमाल होने वाला पेड़ है, इसे नहीं जलाना चाहिए.
आम: शुभ कामों में आम के पत्ते लगाए जाते हैं, इसलिए इसकी लकड़ी न जलाएं.
आंवला: धार्मिक और औषधीय महत्व वाला पेड़ है.
नीम: सेहत के लिए फायदेमंद और पवित्र माना जाता है.
केला: पूजा-पाठ में काम आता है.
शोक: खुशहाली का प्रतीक माना जाता है.
बेल: भगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इसे जलाने से बचें.
सूखी लकड़ियां और टहनियां: गिरी हुई या सूखी लकड़ियां सबसे अच्छी रहती हैं.
एरंड और गूलर की सूखी टहनियां: इन्हें शुभ माना जाता है.
गाय के गोबर के कंडे: पूजा में खास महत्व है और वातावरण को भी शुद्ध करते हैं.
सूखी घास और खर-पतवार: आसानी से मिल जाते हैं और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं.
नई फसल की बालियां: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना के लिए डाली जाती हैं.
नारियल, रोली और चावल: पूजा के समय शुभ माने जाते हैं.
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