Mahakal Bhasma Aarti: सावन का पावन महीना भगवान शिव को अति प्रिय होता है. ये महीना भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है. उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में इस दौरान भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. माना जाता है कि भस्म आरती भगवान महाकाल के उग्र स्वरूप की पूजा का प्रतीक माना जाता है. इस आरती को देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. लेकिन इस आरती में महिलाओं को नहीं शामिल किया जाता है. अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि भस्म आरती में महिलाओं को आखिर क्यों नहीं शामिल किया जाता है.
भस्म आरती में क्यों शामिल नहीं होती महिलाएं?
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, रोज सुबह भगवान महाकाल का पूरे विधि-विधान के साथ स्नान कराया जाता है. इस दौरान महाकाल के वस्त्र उतार दिए जाते हैं. और वह पूर्ण रूप से निर्वस्त्र होते हैं. इस रूम में महाकाल के दर्शन करने से महिलाओं को मनाही होती है. इसी के साथ धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्त आरती के दौरान शिव जी का उग्र और शक्तिशाली रूप प्रभावशाली होता है. इसी कारण भस्म आरती के लिए महिलाओं के लिए अलग नियम बनाए गए हैं.
भस्म आरती का धार्मिक महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कुल 12 में से तीसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यहां की भस्म आरते पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. ये आरती रोज ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है. इस आरती में शामिल होने से मौत का भय दूर हो जाता है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, पूराने समय में भगवान शिव ने राक्षस दूषण का वध कर उसकी भस्म से अपना पूरा शृंगार किया था. उसी के बाद से भस्म आरती की परंपरा चलती आ रही है.
ये भी पढ़ें: नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाने के फायदे, जानिए धार्मिक परंपरा और इसके पीछे की असली वजह
भस्म आरती के नियम
- भस्त आरती की लिए पुरुषों को धोती पहनना जरूरी होता है.
- आरती के दौरान महिलाओं को घूंघट करना जरूरी होता है.
- कैमरा, मोबाइल और चमड़ें की चीजें भीतर नहीं ले जा सकते.
ये भी पढ़ें: Pune Murder Case: उस रात कमरा नंबर 310 में क्या हुआ, जिसने लव ट्रायंगल को दिया खूनी रंग, हो जाएंगे हैरान