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Home > धर्म > Ganesh Utsav: 66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और हजारों भक्तों के लिए अन्नदान… ऐसा है मुंबई का GSB महागणपति

Ganesh Utsav: 66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और हजारों भक्तों के लिए अन्नदान… ऐसा है मुंबई का GSB महागणपति

Ganesh Utsav: मुंबई के किंग्स सर्किल स्थित GSB सेवा मंडल के महागणपति का इस साल का भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गणपति बप्पा को 66 किलो से ज्यादा सोने, 335 किलो चांदी और कीमती रत्नों से सजाया गया है. पंडाल को 703 करोड़ 27 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर दिया गया है. हालांकि, GSB महागणपति की पहचान सिर्फ भव्य आभूषणों से नहीं, बल्कि वैदिक परंपरा, पूजा, सेवा और अन्नदान से भी जुड़ी है.

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Last Updated: September 13, 2026 21:37:40 IST

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Ganesh Utsav: गणेश महोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर से होने जा रहा है और इस बार देशभर में गणपति बप्पा के भव्य पंडाल सज चुके हैं. इनमें मुंबई के गणेश पंडालों की खास चर्चा रहती है. मायानगरी में किंग्स सर्किल स्थित GSB सेवा मंडल का महागणपति हर साल अपनी भव्यता के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है. इस बार गणपति बप्पा को 66 किलो से ज्यादा सोने, 335 किलो चांदी और कीमती रत्नों से सजाया गया है. यही वजह है कि पंडाल को 703 करोड़ 27 लाख रुपये का रिकॉर्ड इंश्योरेंस कवर भी दिया गया है.

सोने-चांदी से सजे महागणपति का हुआ मुखदर्शन

रविवार को गणेश महोत्सव से पहले GSB सेवा मंडल के महागणपति का प्रथम मुखदर्शन हुआ. भव्य आभूषणों और कीमती रत्नों से सजे गणपति बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. बप्पा का दिव्य और भव्य स्वरूप देखकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला. गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. मुंबई के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों से भी भक्त GSB महागणपति के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं.

703 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कवर

GSB महागणपति की भव्य सजावट को देखते हुए पंडाल को 703 करोड़ 27 लाख रुपये का रिकॉर्ड इंश्योरेंस कवर दिया गया है. यह कवर सिर्फ सोने-चांदी और कीमती आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि गहनों, साजो-सामान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर दिया गया है. 66 किलो से अधिक सोने और 335 किलो चांदी के साथ कीमती रत्नों से सजे बप्पा के आभूषण हर साल इस गणपति पंडाल की खास पहचान बनते हैं.

सिर्फ दौलत नहीं, वैदिक परंपरा भी पहचान

GSB सेवा मंडल के महागणपति की पहचान सिर्फ सोने-चांदी की भव्यता से नहीं है. यहां वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और सेवा को भी विशेष महत्व दिया जाता है. गणेश महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और मंडल की ओर से उनकी सेवा की व्यवस्था की जाती है. मंडल की ओर से FDA के नियमों और गाइडलाइंस का पालन करने की बात भी कही गई है. श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था से लेकर जरूरतमंदों तक अन्न पहुंचाने की परंपरा को भी उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

अन्नदान और सेवा पर भी जोर

GSB सेवा मंडल की ओर से दान और अन्नदान की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है. मंडल के अमित पाई ने बताया कि श्रद्धालुओं की सेवा और जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाना मंडल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. गणेश महोत्सव के दौरान यहां आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन आदि की व्यवस्था की जाती है. इस तरह GSB महागणपति का उत्सव सिर्फ भव्य सजावट और आभूषणों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूजा, सेवा और अन्नदान की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है.

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Ganesh Utsav: गणेश महोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर से होने जा रहा है और इस बार देशभर में गणपति बप्पा के भव्य पंडाल सज चुके हैं. इनमें मुंबई के गणेश पंडालों की खास चर्चा रहती है. मायानगरी में किंग्स सर्किल स्थित GSB सेवा मंडल का महागणपति हर साल अपनी भव्यता के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है. इस बार गणपति बप्पा को 66 किलो से ज्यादा सोने, 335 किलो चांदी और कीमती रत्नों से सजाया गया है. यही वजह है कि पंडाल को 703 करोड़ 27 लाख रुपये का रिकॉर्ड इंश्योरेंस कवर भी दिया गया है.

सोने-चांदी से सजे महागणपति का हुआ मुखदर्शन

रविवार को गणेश महोत्सव से पहले GSB सेवा मंडल के महागणपति का प्रथम मुखदर्शन हुआ. भव्य आभूषणों और कीमती रत्नों से सजे गणपति बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. बप्पा का दिव्य और भव्य स्वरूप देखकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला. गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. मुंबई के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों से भी भक्त GSB महागणपति के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं.

703 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कवर

GSB महागणपति की भव्य सजावट को देखते हुए पंडाल को 703 करोड़ 27 लाख रुपये का रिकॉर्ड इंश्योरेंस कवर दिया गया है. यह कवर सिर्फ सोने-चांदी और कीमती आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि गहनों, साजो-सामान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर दिया गया है. 66 किलो से अधिक सोने और 335 किलो चांदी के साथ कीमती रत्नों से सजे बप्पा के आभूषण हर साल इस गणपति पंडाल की खास पहचान बनते हैं.

सिर्फ दौलत नहीं, वैदिक परंपरा भी पहचान

GSB सेवा मंडल के महागणपति की पहचान सिर्फ सोने-चांदी की भव्यता से नहीं है. यहां वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और सेवा को भी विशेष महत्व दिया जाता है. गणेश महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और मंडल की ओर से उनकी सेवा की व्यवस्था की जाती है. मंडल की ओर से FDA के नियमों और गाइडलाइंस का पालन करने की बात भी कही गई है. श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था से लेकर जरूरतमंदों तक अन्न पहुंचाने की परंपरा को भी उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

अन्नदान और सेवा पर भी जोर

GSB सेवा मंडल की ओर से दान और अन्नदान की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है. मंडल के अमित पाई ने बताया कि श्रद्धालुओं की सेवा और जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाना मंडल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. गणेश महोत्सव के दौरान यहां आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन आदि की व्यवस्था की जाती है. इस तरह GSB महागणपति का उत्सव सिर्फ भव्य सजावट और आभूषणों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूजा, सेवा और अन्नदान की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है.

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