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Sawan Shiv Chalisa: सावन  में शिव चालीसा का पाठ क्यों माना जाता है इतना शुभ? जानिए सही तरीका और धार्मिक महत्व

Shiv Chalisa In Hindi: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. आइए जान लेते हैं कि सोमवार के दिन शिव चालिसा का पाठ इतना शुभ क्यों माना जाता है.

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Last Updated: August 5, 2026 17:55:40 IST

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Shiv Chalisa In Hindi: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. कोई कांवड़ लाकर जलाभिषेक करता है तो कोई व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगता है. धार्मिक मान्यता है कि यदि सावन में श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना की जाए, तो जीवन की कई परेशानियां दूर होने लगती हैं. इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन दिनों नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ भी करते हैं.

भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. मान्यता है कि सावन के महीने में शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. खासतौर पर सोमवार के दिन इसका पाठ करना अधिक शुभ माना गया है.

 शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ माने जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे भय, तनाव और नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है. नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन शांत रहता है. घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति भी मिलती है.

 कब करें शिव चालीसा का पाठ?

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा करें. इसके बाद शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल अर्पित करें. बेलपत्र, धतूरा और पुष्प चढ़ाने के बाद श्रद्धा के साथ शिव चालीसा का पाठ करें. यदि रोज संभव न हो, तो कम से कम सावन के प्रत्येक सोमवार को इसका पाठ अवश्य करें.

शिव चालीसा का पाठ (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: August 5, 2026 17:55:40 IST

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Shiv Chalisa In Hindi: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. कोई कांवड़ लाकर जलाभिषेक करता है तो कोई व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगता है. धार्मिक मान्यता है कि यदि सावन में श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना की जाए, तो जीवन की कई परेशानियां दूर होने लगती हैं. इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन दिनों नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ भी करते हैं.

भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. मान्यता है कि सावन के महीने में शिव चालीसा का नियमित पाठ करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. खासतौर पर सोमवार के दिन इसका पाठ करना अधिक शुभ माना गया है.

 शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ माने जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे भय, तनाव और नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है. नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन शांत रहता है. घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति भी मिलती है.

 कब करें शिव चालीसा का पाठ?

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा करें. इसके बाद शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल अर्पित करें. बेलपत्र, धतूरा और पुष्प चढ़ाने के बाद श्रद्धा के साथ शिव चालीसा का पाठ करें. यदि रोज संभव न हो, तो कम से कम सावन के प्रत्येक सोमवार को इसका पाठ अवश्य करें.

शिव चालीसा का पाठ (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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