Solar Eclipse 2026: सनातन धर्म में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना माना जाता है. ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं. इन्हीं में एक मान्यता यह भी है कि ग्रहण और सूतक काल के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता. साथ ही कई मंदिरों के कपाट भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए जाते हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता बताई जाती है.
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसी कारण ग्रहण के दौरान पूजा-अर्चना, मूर्ति स्पर्श और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से परहेज करने की सलाह दी जाती है. मान्यता यह भी है कि मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में दिव्य शक्ति का निवास होता है, इसलिए ग्रहण समाप्त होने तक उन्हें स्पर्श नहीं किया जाता.
सूतक काल में मंदिरों के कपाट क्यों बंद रहते हैं?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से पहले लगने वाले सूतक काल में कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस अवधि में नियमित पूजा और आरती भी रोक दी जाती है. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर की साफ-सफाई की जाती है, गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया जाता है और फिर विधि-विधान से पूजा दोबारा शुरू होती है.
ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करना चाहिए?
मान्यता है कि ग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले स्नान करना चाहिए. इसके बाद घर और पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है. श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार भगवान की पूजा करते हैं और अन्न, वस्त्र या धन का दान भी करते हैं. इसे पुण्यदायी माना जाता है.
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसी वजह से भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य पूजा-पाठ व धार्मिक गतिविधियां पहले की तरह जारी रह सकेंगी.