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Home > मनोरंजन > अल्ताफ राजा का वो गाना, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में बनाई जगह, एक दिन में बिकी थीं 70 लाख कॉपी

अल्ताफ राजा का वो गाना, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में बनाई जगह, एक दिन में बिकी थीं 70 लाख कॉपी

Altaf Raja: 90 के दशक में जब टूटे दिल की बात होती थी, तो सबसे पहले याद आते थे अल्ताफ राजा के दुख भरे गाने. वे गाने जो मेनस्ट्रीम बॉलीवुड गाने का हिस्सा तो नहीं थे लेकिन जब भी कानों में आवाज आती, तो पुरानी यादों में डुबा देते थे.

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Last Updated: September 19, 2026 15:12:06 IST

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Altaf Raja: 90 का दशक… जब प्यार का इजहार खतों से होता था और ब्रेकअप का दर्द अक्सर टेप रिकॉर्डर पर बजते किसी गाने में सुनाई देता था. कुमार सानू, उदित नारायण, अभिजीत और सोनू निगम जैसे गायकों की आवाज हर तरफ सुनाई देती थी. इसी दौर में एक ऐसी आवाज आई, जो न तो किसी बड़े फिल्मी हीरो के पीछे थी और न ही किसी मेनस्ट्रीम बॉलीवुड गाने का हिस्सा. आवाज थी अल्ताफ राजा की. 

1997 में उनका गाना ‘तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे…’ रिलीज हुआ. देखते ही देखते यह उन लोगों का पसंदीदा गीत बन गया, जिनके हिस्से में प्यार से ज्यादा जुदाई आई थी. उस वक्त न सोशल मीडिया था, न म्यूजिक ऐप्स और न ही कुछ सेकेंड में गाना वायरल होने का तरीका. फिर भी यह गाना घर-घर पहुंच गया. लोग इसे टेप पर बार-बार सुनते और अपने टूटे दिल का दर्द इस गीत में ढूंढते थे.

रातोंरात मिली पहचान

खास बात यह थी कि अल्ताफ राजा की आवाज में दर्द दिखाने की कोशिश नहीं लगती थी बल्कि वह सीधे सुनने वाले के दिल तक पहुंचती थी. 1997 में वीनस के बैनर तले आए एल्बम ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी. यह कोई फिल्मी गाना नहीं था लेकिन इसकी लोकप्रियता कई बड़े फिल्मी गानों पर भारी पड़ गई. गाने की कहानी भी बिल्कुल आम जिंदगी जैसी थी. प्यार हुआ, रिश्ते में दरार आई और फिर सामने रह गया सिर्फ धोखा और जुदाई का दर्द.

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल नाम

यही वजह थी कि कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर आशिक मिजाज लोगों तक, हर किसी को इसमें अपनी कहानी नजर आने लगी. कॉन्सर्ट में अल्ताफ राजा जहां भी पहुंचते, दर्शकों की एक ही फरमाइश होती कि पहले वही गाना सुनाइए, जिसने दिल तोड़ने वालों को अपना गीत दे दिया था. इस गाने की लोकप्रियता से जुड़े आंकड़े भी उस दौर की दीवानगी बताते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी करोड़ों कैसेट्स बिकीं और एक दिन में ही करीब 70 लाख कॉपियां बिकने का दावा किया गया. इसी बिक्री के रिकॉर्ड के कारण गाने का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से भी जोड़ा गया.

जहीर आलम के शब्द और…

बता दें कि इस गीत के बोल जहीर आलम ने लिखे थे. वहीं इसका संगीत मोहम्मद सैफी नियाजी ने दिया था. अल्ताफ राजा ने इसे जिस अंदाज में गाया, उसने एक साधारण जुदाई के गीत को 90s का यादगार ब्रेकअप सॉन्ग बना दिया. आज भी 90 के दशक के लोग इस गाने और अल्ताफ राजा के गानों को सुनते और गुनगुनाते हैं. इस गाने के बजते ही लोग फिर पुराने वक्त और उन यादों में खो जाते हैं.

ये भी पढ़ें: कभी लड़की बनकर स्टेज पर की एक्टिंग, रेलवे स्टेशन पर हुई मुलाकात से बदली जिंदगी; एक ही फिल्म में निभाए नौ किरदार, कहलाए नटसम्राट

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Altaf Raja: 90 का दशक… जब प्यार का इजहार खतों से होता था और ब्रेकअप का दर्द अक्सर टेप रिकॉर्डर पर बजते किसी गाने में सुनाई देता था. कुमार सानू, उदित नारायण, अभिजीत और सोनू निगम जैसे गायकों की आवाज हर तरफ सुनाई देती थी. इसी दौर में एक ऐसी आवाज आई, जो न तो किसी बड़े फिल्मी हीरो के पीछे थी और न ही किसी मेनस्ट्रीम बॉलीवुड गाने का हिस्सा. आवाज थी अल्ताफ राजा की. 

1997 में उनका गाना ‘तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे…’ रिलीज हुआ. देखते ही देखते यह उन लोगों का पसंदीदा गीत बन गया, जिनके हिस्से में प्यार से ज्यादा जुदाई आई थी. उस वक्त न सोशल मीडिया था, न म्यूजिक ऐप्स और न ही कुछ सेकेंड में गाना वायरल होने का तरीका. फिर भी यह गाना घर-घर पहुंच गया. लोग इसे टेप पर बार-बार सुनते और अपने टूटे दिल का दर्द इस गीत में ढूंढते थे.

रातोंरात मिली पहचान

खास बात यह थी कि अल्ताफ राजा की आवाज में दर्द दिखाने की कोशिश नहीं लगती थी बल्कि वह सीधे सुनने वाले के दिल तक पहुंचती थी. 1997 में वीनस के बैनर तले आए एल्बम ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी. यह कोई फिल्मी गाना नहीं था लेकिन इसकी लोकप्रियता कई बड़े फिल्मी गानों पर भारी पड़ गई. गाने की कहानी भी बिल्कुल आम जिंदगी जैसी थी. प्यार हुआ, रिश्ते में दरार आई और फिर सामने रह गया सिर्फ धोखा और जुदाई का दर्द.

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल नाम

यही वजह थी कि कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर आशिक मिजाज लोगों तक, हर किसी को इसमें अपनी कहानी नजर आने लगी. कॉन्सर्ट में अल्ताफ राजा जहां भी पहुंचते, दर्शकों की एक ही फरमाइश होती कि पहले वही गाना सुनाइए, जिसने दिल तोड़ने वालों को अपना गीत दे दिया था. इस गाने की लोकप्रियता से जुड़े आंकड़े भी उस दौर की दीवानगी बताते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी करोड़ों कैसेट्स बिकीं और एक दिन में ही करीब 70 लाख कॉपियां बिकने का दावा किया गया. इसी बिक्री के रिकॉर्ड के कारण गाने का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से भी जोड़ा गया.

जहीर आलम के शब्द और…

बता दें कि इस गीत के बोल जहीर आलम ने लिखे थे. वहीं इसका संगीत मोहम्मद सैफी नियाजी ने दिया था. अल्ताफ राजा ने इसे जिस अंदाज में गाया, उसने एक साधारण जुदाई के गीत को 90s का यादगार ब्रेकअप सॉन्ग बना दिया. आज भी 90 के दशक के लोग इस गाने और अल्ताफ राजा के गानों को सुनते और गुनगुनाते हैं. इस गाने के बजते ही लोग फिर पुराने वक्त और उन यादों में खो जाते हैं.

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