Kishore Kumar Evergreen Song: बारिश की हल्की बूंदें, आंखों में ठहरा हुआ दर्द और किसी अपने के लौटकर कभी न आने का एहसास उसके चाहने वाले को अंदर तक झकझोर देता है. कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते बल्कि जीए जाते हैं. 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘अनामिका’ का ‘मेरी भीगी-भीगी सी’ ऐसा ही एक गीत है, जो अधूरी मोहब्बत की सबसे गहरी आवाज बन गया. किशोर कुमार की दर्द भरी आवाज इस गीत को सिर्फ रोमांटिक नहीं बल्कि टूटे हुए दिल की कहानी बना देती है.
एक लाइन जिसने दी अलग पहचान
गीत की शुरुआत एक ऐसे प्रेमी से होती है, जो अपनी बिखरी हुई दुनिया को याद कर रहा है. उसकी पलकों पर अब भी पुराने सपने ठहरे हुए हैं और हर शब्द में खोए हुए प्यार की टीस महसूस होती है. जैसे-जैसे गीत आगे बढ़ता है, दर्द शिकायत में बदलने लगता है. फिर आती है वह लाइन जिसने इस गीत को हमेशा के लिए अलग पहचान दी. ‘अनामिका, तू भी तरसे…’ यह एक प्रेमी की बद्दुआ है, जो उसकी बेबसी दिखाता है, जिसे बेवफाई ने अंदर तक तोड़ दिया हो.
किशोर कुमार की आवाज और मजरूह सुल्तानपुरी के बोल
इस अमर गीत को किशोर कुमार ने आवाज दी थी. वहीं इसके बोल मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. संगीतकार आर.डी. बर्मन ने इसकी धुन में ऐसा दर्द पिरोया कि पांच दशक बाद भी यह गीत हर पीढ़ी को अपना सा लगता है. आसान शब्दों में लिखा गया यह गीत प्रेम, तड़प, गुस्सा और इंतजार चारों भाव एक साथ समेट लेता है.
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म ‘अनामिका’ में संजीव कुमार और जया भादुड़ी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. रघुनाथ जलानी के निर्देशन में बनी यह रोमांटिक थ्रिलर एक ऐसी रहस्यमयी युवती की कहानी थी, जिसकी पहचान ही पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल बन जाती है. फिल्म में हेलेन, असरानी, ए.के. हंगल और इफ्तेखार जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं.
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