Song Secret: सावन का मौसम आते ही मौसम का मिजाज भी बदल जाता है. आसमान में हर तरफ काले बादल, बारिश की बूंदें, हल्की बौछार, हर तरफ हरियाली और पेड़ों पर पड़े झूले और बहुत कुछ. ये माहौल और भी खास तब हो जाता है, जब लता मंगेशकर और आशा भोसले की आवाज में ‘पड़ गए झूले, सावन रुत आई रे’ गाना बजता है. उनका ये गाना आज भी लोगों के जहन में है. ये केवल एक सावन का गीत नहीं बल्कि उस दौर की यादें समेटे हुए एक गाना है, जो गीतों में मौसम, रिश्ते और भावनाओं को खूबसूरती से दिखाता है.
सावन आते ही चर्चा में रहता है गाना
सावन का महीना केवल एक महीना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में झूलों, लोकगीतों, सखियों के साथ मस्ती और मायके जाने की परंपराओं से भी जुड़ा रहा है. महिलाओं के लिए ये गाना काफी खास होता है. सावन का महीना उनके लिए लंबे समय से उत्सव और उमंग का प्रतीक रहा है. ऐसे में ‘पड़ गए झूले, सावन रुत आई रे’ जैसे गीत इसे और भी खास बना देते हैं. गाने में सावन की आहट के साथ झूलों और खुशियों का जो माहौल बनाया गया है, वह सुनने वाले को सीधे पुराने दौर में ले जाता है.
लता और आशा की आवाज ने कर दिया कमाल
लता मंगेशकर और आशा भोसले हिंदी सिनेमा की दो ऐसी आवाजें हैं, जिन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. दोनों बहनों की आवाज का अपना अलग जादू था. जब दोनों की आवाज एक साथ किसी गीत में सुनाई देती थी, तो उसकी खूबसूरती और बढ़ जाती थी. इस गाने में भी आशा और लता मंगेशकर की आवाज इसे सावन की मस्ती और उल्लास को पूरी तरह महसूस कराती है.
झूले, बारिश और सखियों की मस्ती
आज के दौर में सावन का मतलब भले ही बारिश और सोशल मीडिया पर रील्स बनाना हो गया हो लेकिन पुराने हिंदी फिल्मों के गानों में सावन की तस्वीर कुछ और ही हुआ करती थी. नागपंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे त्योहार, शादी के बाद लड़कियों का सावन में गांव आना, पेड़ों पर पड़े झूले, रंग-बिरंगे कपड़ों में सजी लड़कियां और महिलाएं, सखियों के साथ हंसी-मजाक और बारिश की बूंदें, ये सभी चीजें सावे की खास पहचान हैं.