Breast Cancer Pink Ribbon Connection: अक्टूबर आते ही अस्पतालों और कई इमारतों पर गुलाबी रिबन दिखाई देने लगता है. यह रंग आज ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता की पहचान बन चुका है. लेकिन इसकी कहानी जितनी आसान दिखती है, उतनी ही दिलचस्प है. खास बात यह है कि पहला रिबन गुलाबी नहीं, बल्कि पीच रंग का था. अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के तौर पर मनाने की शुरुआत 1985 में हुई थी. हालांकि, उस समय इसके साथ कोई खास साझा प्रतीक नहीं था. करीब सात साल बाद गुलाबी रिबन ने इस अभियान को एक अलग पहचान दी.
चार्लोट हेली ने बनाया था पहला रिबन
इस कहानी में कैलिफोर्निया की चार्लोट हेली का अहम योगदान था. उनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का दर्द करीब से देखा गया था. उनकी दादी की मौत कम उम्र में इस बीमारी से हुई थी, जबकि उनकी बहन और बेटी इससे उबर चुकी थीं. हेली ने अपने घर में हाथ से पीच रंग के रिबन बनाए. वह इन्हें एक कार्ड के साथ लोगों को देती थीं. उनका मकसद लोगों को जागरूक करना और सरकार से ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम के लिए ज्यादा ध्यान देने की मांग करना था.
1992 में आया गुलाबी रिबन
साल 1992 में गुलाबी रिबन बड़े स्तर पर सामने आया. एस्टी लॉडर के मेकअप काउंटरों पर करीब 15 लाख रिबन बांटे गए. इनके साथ ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जाम की जानकारी वाला कार्ड भी दिया गया. गुलाबी रंग को देखभाल, नरमी और स्त्रीत्व से जोड़ा गया, इसलिए यह लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया.
चार्लोट हेली ने कमर्शियल इस्तेमाल से किया इनकार
सेल्फ मैगजीन की संपादक एलेक्जेंड्रा पेनी ने हेली के पीच रिबन के विचार को राष्ट्रीय अभियान में इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी. हेली ने इसे बहुत ज्यादा कमर्शियल मानते हुए मना कर दिया. इसके बाद पीच की जगह गुलाबी रंग का इस्तेमाल किया गया और देखते ही देखते यह दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता का प्रतीक बन गया.
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पिंक रिबन पर उठे सवाल
गुलाबी रिबन की लोकप्रियता के साथ ‘पिंक-वॉशिंग’ को लेकर सवाल भी उठे. आलोचकों का कहना है कि कुछ कंपनियां गुलाबी रिबन का इस्तेमाल बिक्री बढ़ाने के लिए करती हैं, लेकिन बीमारी की रिसर्च या मरीजों की मदद के लिए पर्याप्त योगदान नहीं देतीं. यही वजह है कि कई संगठन लोगों से अपील करते हैं कि गुलाबी रिबन वाले किसी उत्पाद को खरीदने से पहले यह जरूर देखें कि उससे मिलने वाली रकम वास्तव में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता और मरीजों की मदद में कहां जा रही है. आज गुलाबी रिबन दुनिया भर में जागरूकता का प्रतीक है, लेकिन इसकी शुरुआत करने वाली चार्लोट हेली की कहानी इस अभियान के पीछे छिपे जमीनी संघर्ष और सवाल उठाने की ताकत को याद दिलाती है.