Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ‘यादव जी की लव स्टोरी’ का नाम बदलने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जिसके बाद याचिकाकर्ता को गहरा झटका लगा है. इससे पहले मनोज वाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडित के नाम को लेकर भी विवाद हुआ था.
सुप्रीम कोर्ट ने यादव जी की लव स्टोरी के नाम बदलने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
Yadav Ji Ki Love Story: आजकल फिल्मों के नाम को लेकर लोगों की भावनाएं आहत हो रही है. पहले घूसखोर पंडित को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसके बाद विवाद खड़ा होने के बाद डायरेक्टर ने इस फिल्म का नाम बदलने की घोषणा कर दी. अब ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. हालांकि फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडित’ के बाद ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर भी विवाद हुआ था. इसके बाद टाइटल बदलने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी.
बुधवार (25 फरवरी, 2026) को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि फिल्म का टाइटल एक नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि फिल्म का टाइटल समाज के सामाजिक प्रभाव को नुकसान पहुंचा सकता है और मौजूदा टाइटल के तहत इसकी रिलीज को रोकने के लिए निर्देश मांगे. याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बताई गई चिंताएं बेबुनियाद थीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने देखा कि फिल्म के टाइटल में यादव समाज के खिलाफ कोई एडजेक्टिव या एक्सप्रेशन नहीं था. कोर्ट ने घुसखोर पंडित में अपने पहले के फैसले से हटकर कहा कि घुसखोर (मतलब भ्रष्ट) शब्द एक समुदाय के लिए साफ तौर पर नेगेटिव मतलब रखता है, जो यहां नहीं था. कोर्ट ने माना कि संविधान के आर्टिकल 19(2) के तहत कोई वजह नहीं बनती क्योंकि टाइटल समुदाय को नेगेटिव तरीके से नहीं दिखाता था और इसलिए रिट पिटीशन खारिज कर दी.
यादव समुदाय के एक प्रतिनिधि की तरफ से फाइल की गई याचिका में दावा किया गया था कि टाइटल उनकी सामाजिक इज्जत को नुकसान पहुंचा सकता है और समुदाय को नेगेटिव तरीके से दिखाता है. याचिकाकर्ता ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने या इसके टाइटल में बदलाव की मांग की थी. याचिका कर्ता ने इसे पहले के ‘घुसखोर पंडित’ विवाद से जोड़ते हुए ये मांग की थी. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने पिटीशन पर सुनवाई करने से मना कर दिया और इसे खारिज कर दिया.
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