राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का बड़ा हमला! नेहरू से लेकर राहुल तक, गांधी परिवार ने विदेशी ताकतों के लिए देश से क्या समझौते किए? जानें इन सनसनीखेज आरोपों का सच.
पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर किए तीखे वार!
Piyush Goyal Slams Rahul Gandhi: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कैसे गांधी परिवार ‘समझौता राजनीति’ का एक उदाहरण रहा है. पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी ने लगातार देश के हितों से समझौता किया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चाहे कांग्रेस का इतिहास हो या वर्तमान, या भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामले, सभी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पार्टी विदेशी ताकतों के प्रभाव में आकर जनता और देश के हितों से समझौता करती रही है. इस तरह की राजनीति देश और उसके नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य को नुकसान पहुंचाती है, और जनता के सामने इसके कई उदाहरण हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कभी सोरोस तो कभी पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर अपने ही देश के खिलाफ रुख अपनाते दिखते हैं.
केंद्रीय मंत्री गोयल ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है और ऐसा लगता है कि वे विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं. राहुल गांधी को ‘नेगेटिव पॉलिटिक्स का पोस्टर बॉय’ कहते हुए गोयल ने कहा कि उन्होंने 247 बार विदेश यात्रा की है और बार-बार प्रोटोकॉल को नज़रअंदाज़ किया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी लद्दाख के सेंसिटिव बॉर्डर इलाके में भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले विदेशी लोगों के संपर्क में थे.
बोफोर्स स्कैंडल का ज़िक्र करते हुए गोयल ने कहा कि एक दोस्त ओटावियो को बचाने के लिए निष्पक्ष जांच से मना कर दिया गया और गांधी परिवार ने देश के साथ समझौता किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी कांग्रेस पार्टी पर विदेशी असर के आरोप लगते रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक परिवार के कई नेताओं पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगा। 1971 के शिमला समझौते का ज़िक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि 93,000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा क्यों किया गया, लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर वापस क्यों नहीं लिया गया? उन्होंने यह भी कहा कि 1954 में नेहरू ने तिब्बत पर भारत के अधिकार छोड़ दिए थे, जो उनके अनुसार एक और बड़ा समझौता था। उन्होंने दावा किया कि नेहरू-गांधी परिवार की राजनीति हमेशा देश के हित के साथ समझौता करने वाली रही है।
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