How to know obesity: आप मोटे हैं या नहीं... ज्यादातर लोगों में कंफ्यूजन रहती है. यदि आप भी ऐसा ही कुछ सोचते हैं तो अब सही वजन जानने के लिए परेशानी नहीं होगी. क्योंकि, वैज्ञानिकों ने एक सटीक और नायाब तरीका खोज निकाला है. हालांकि, अब तक लोग BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स के जरिए अपने वजन को मापते थे. लेकिन, Waist-to-height ratio मोटापा मापने का सही तरीका है.
How to know obesity: आप मोटे हैं या नहीं… ज्यादातर लोगों में कंफ्यूजन रहती है. कुछ लोगों का वजन अधिक होता है, लेकिन उनको नहीं लगता है. वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जिनका वजन कम होता है, लेकिन ज्यादा लगता है. यदि आप भी ऐसा ही कुछ सोचते हैं तो अब सही वजन जानने के लिए परेशानी नहीं होगी. क्योंकि, वैज्ञानिकों ने एक सटीक और नायाब तरीका खोज निकाला है. हालांकि, अब तक लोग BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स के जरिए अपने वजन को मापते थे. लेकिन हाल ही में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी’ में पब्लिश हुई एक रिसर्च ने इस बात पर सवाल उठाया है. अब, शेफील्ड यूनिवर्सिटी और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया है कि Waist-to-height ratio मोटापा मापने का सही तरीका है.
बता दें कि, दुनियाभर में मोटापा आज बड़ी परेशानी बनकर उभरा है. इसके शिकार हुए लोगों की फेहरिस्त लंबी है. इसका सबसे बड़ा कारण हमारी बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान ही है. इसी का नतीजा है कि, मोटापा आज एक वैश्विक महामारी की तरह फैल रहा है. इससे निजात पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं. परेशान होकर लोग मार्केट से दवाएं तक लेकर खा रहे हैं. आपका वजन कितना है, अब तक ये पता करने के लिए नया तरीका कारगर साबित होगा.
वैज्ञानिकों का दावा है कि आपकी हेल्थ और मोटापे के जोखिम को मापने के लिए BMI के मुकाबले ‘कमर-से-लंबाई का अनुपात’ (Waist-to-Height Ratio – WHtR) अधिक सटीक और भरोसेमंद तरीका है. ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को समझने में भी मदद मिलेगी. अब ये तरीका क्या है और वैज्ञानिकों ने बीएमआई को क्यों कम भरोसेमंद बताया, इस बारे में जान लीजिए.
रिसर्चर्स द्वारा की गई स्टडी में उन्होंने 2005 से 2021 के बीच इंग्लैंड के हेल्थ सर्वे का उपयोग करते हुए 11 से 89 वर्ष की उम्र के 1.20 लाख से अधिक लोगों के डेटा की जांच की. रिसर्च में पाया गया है कि Waist-to-Height Ratio (WHtR) उम्र बढ़ने के साथ मोटापे के जोखिम को ज्यादा बेहतर तरीके से दिखाता है. उनका कहना है कि BMI केवल वजन और ऊंचाई के आधार पर आंकलन करता है और बीएमआई यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा हो रहा है. वहीं, कमर-से-लंबाई का अनुपात सीधे तौर पर पेट के आसपास मौजूद चर्बी को मापता है जो सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है.
एक वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, उम्र बढ़ने पर शरीर में मसल्स कम होने लगते हैं और फैट पर्सेंट अधिक हो सकता है. इसलिए BMI इसे सही से नहीं पकड़ पाता. कई बार ये भी देखा गया कि, बुजुर्गों का BMI तो सामान्य रहता है, लेकिन पेट में चर्बी अधिक होती है. ऐसा होने के कारण उन्हें दिल की बीमारी या डायबिटीज का खतरा बना रहता है. यही वजह है कि BMI पर पूरी तरह निर्भर रहना भ्रामक साबित हो सकता है.
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में फैट खासकर पेट के आसपास जमा होने लगता है. यही सेंट्रल ओबेसिटी दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज का बड़ा कारण बनती है. स्टडी के अनुसार, कमर-से-लंबाई अनुपात इन बीमारियों के खतरे को पहले ही पहचानने में मदद कर सकता है, जिससे समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव संभव है.
कमर-से-लंबाई का अनुपात निकालना बेहद आसान है. इसके लिए कमर का साइज (Cm) और ऊंचाई (Cm) का भाग दे दीजिए. यानी किसी की कमर का साइज 100 सेमी है और उसकी लंबाई 170 सेमी है. तो 100 ÷ 170 = 0.588 आता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह आंकड़ा 0.5 से अधिक है तो इसे सेहत के लिए चेतावनी संकेत माना जाता है. मतलब साफ है कि कमर आपकी ऊंचाई के आधे से अधिक नहीं होनी चाहिए.
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