UTI Problem Cause: यूटीआई (Urinary Tract Infection) यानी मूत्र मार्ग का संक्रमण से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. इससे पीड़ितों को सामान्यतौर पर यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखने के लिए अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट इसको काफी नहीं मानते हैं. क्योंकि, टॉयलेट में यूज होने वाला पेपर भी इस बीमारी को जन्म दे सकता है. डॉक्टर से जानिए कैसे-
टॉयलेट पेपर भी बन सकता यूटीआई की वजह, जानिए कैसे- (Canva)
UTI Problem Cause: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में कई गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं. यूटीआई (Urinary Tract Infection) यानी मूत्र मार्ग का संक्रमण इनमें से एक है. भारत में इससे पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. इससे पीड़ितों को सामान्यतौर पर यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखने के लिए अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है. लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट इसको काफी नहीं मानते हैं. क्योंकि, हमारी छोटी-छोटी आदतें भी इस पर गहरा असर डालती हैं. टॉयलेट में यूज होने वाला पेपर भी इनमें से एक है. बता दें कि, कई बार हम यह ध्यान ही नहीं देते कि हम कौन-सा टॉयलेट पेपर इस्तेमाल कर रहे हैं. जबकि यही छोटी सी चीज जलन, असहजता और बार-बार होने वाले UTI (यूरिन इन्फेक्शन) की वजह बन सकती है. खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. टीओआई के साथ बातचीत में डॉ. एलएच. हीरानंदानी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर यूरोलॉजी के डॉ. प्रकाश चंद्र शेट्टी ने भी यूटीआई के लिए टॉयलेट पेपर को जिम्मेदार ठहराया है.
बातचीत जब डॉ. शेट्टी से पूछा गया कि, टॉयलेट पेपर UTI का कारण क्यों बनता है? इसपर वे बताते हैं कि खराब क्वालिटी या खुशबूदार टॉयलेट पेपर अक्सर रिसाइकल किए गए पेपर से बनते हैं. इनमें ब्लीचिंग एजेंट और केमिकल्स हो सकते हैं, जो पेशाब की नली (यूरेथ्रा) के आसपास की नाजुक त्वचा को इरिटेट करते हैं. इस जलन से E. coli जैसे बैक्टीरिया को शरीर में घुसने का मौका मिल जाता है और जिससे UTI का खतरा बढ़ जाता है.
सिर्फ केमिकल ही नहीं, टॉयलेट पेपर की बनावट भी मायने रखती है. बहुत रूखा, पतला या जल्दी टूटने वाला पेपर छोटे-छोटे टुकड़े छोड़ सकता है. ये टुकड़े नमी और बैक्टीरिया को फंसा लेते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा और बढ़ जाता है. डायबिटीज, मेनोपॉज के हार्मोनल बदलाव, सेंसिटिव स्किन या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है.
डॉ. शेट्टी चेतावनी देते हैं कि गलत तरीके से पोंछना या ज्यादा रगड़ने से त्वचा पर छोटे-छोटे घाव (माइक्रो एब्रेशन) हो सकते हैं. इसके अलावा रंगीन और खुशबूदार टॉयलेट पेपर योनि के pH बैलेंस को बिगाड़ सकते हैं, जिससे UTI का खतरा और बढ़ जाता है.
नरम, बिना खुशबू और बिना रंग वाला टॉयलेट पेपर चुनें. वर्जिन पल्प या अच्छी क्वालिटी बैंबू टॉयलेट पेपर बेहतर विकल्प है. हमेशा आगे से पीछे की तरफ प्राइवेट पार्ट को साफ करें. इसके साथ ही ज्यादा जोर से रगड़ने से बचें
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