Epileptic seizures during pregnancy: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मिर्गी का दौरा ऐसी ही परेशानियों में से एक है. इस स्थिति में चक्कर आना, बेहोशी, पूरे शरीर या अंगों में ऐंठन, मुंह से झाग आ सकता है. हैरानी की बात ये है कि इसको लोग जानकारी के अभाव में भूत-प्रेत का साया कहते हैं. आइए डॉक्टर से जानते हैं इस बीमारी के बारे में-
जानिए, प्रग्नेंसी में मिर्गी के दौरे क्यों और क्या जोखिम. (Canva)
Epileptic seizures during pregnancy: प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए सबसे सुखद एहसासों में से एक है. क्योंकि, इस वक्त हर कोई एक नन्हें मेहमान के इंतजार में होता है. लेकिन, इससे भी ज्यादा जरूरी है कि इस वक्त मां की सेहत का ख्याल रखा जाए. क्योंकि, गर्भावस्था के समय महिलाओं के शरीर में तेजी से बदलाव होता है, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मिर्गी का दौरा ऐसी ही परेशानियों में से एक है. हालांकि, गर्भावस्था (Pregnancy) में मिर्गी के दौरे आना सामान्य बात तो नहीं है, फिर भी कुछ कंडीशन में यह परेशानी हो सकती है. इस स्थिति में चक्कर आना, बेहोशी, पूरे शरीर या अंगों में ऐंठन, मुंह से झाग आ सकता है. सही इलाज के बाद यह बीमारी ठीक हो सकती है.
हैरानी बात यह है कि, कई लोग जानकारी के अभाव के इस बीमारी को कुछ और ही समझ बैठते हैं. कोई कहता है कि, भूत-प्रेत या चुड़ैल का साया है. तो कोई मिर्गी के दौरे की परेशानी को पागलपन कहते हैं. हालांकि, गांव-देहातों में इस तरह के मामले अधिक देखने को मिलते हैं. फिर ये लोग महिला को डॉक्टर के पास ले जाने बजाय तांत्रित के पास लेकर जाते हैं. बेहोश होने पर कोई जूता सुंघाता तो कोई लोहा पकड़ने को कहता है. हाथ-पैर अकड़ने तो समझा जाता कि चुड़ैल शरीर पर चढ़ बैठी है. डॉक्टर कहते हैं कि इस नासमझी से गंभीरता बढ़ सकती है. अब सवाल है कि आखिर प्रेग्नेंसी के दौरान क्यों आ सकते मिर्गी के दौरे? मिर्गी के दौरे की बीमारी क्या है? इसको समझने के लिए India News ने नोएडा की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक और न्यूरोसर्जन डॉ. अजय कुमार प्रजापति से बात की.
डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, गर्भावस्था (Pregnancy) में मिर्गी के दौरे आना सामान्य बात नहीं है, लेकिन मिर्गी से पीड़ित महिलाओं के लिए यह हाई रिस्क वाली स्थिति जरूर हो सकती है. हालांकि, समय पर सही इलाज से बीमारी को दूर किया जा सकता है. इन महिलाओं को डॉक्टर की देखभाल में ही बच्चे को जन्म देना चाहिए. डॉक्टर कहती हैं कि, गर्भावस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों (जैसे नींद की कमी, तनाव या हार्मोनल बदलाव) के कारण दौरे पड़ने की संभावना बढ़ सकती है. ऐसे में जरूरी है कि नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह लेते रहें.
डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि, बीमारी को जो लोग भूत-प्रेत का साया समझते हैं, उनसे मेरा कहना यही है कि समझदार बनें, ताकि बीमारी से बचा जा सके. बता दें कि, मिर्गी (Epilepsy) मस्तिष्क का एक क्रोनिक विकार है, जिसमें न्यूरॉन्स के बीच असामान्य विद्युत संकेतों के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं. यह कोई मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग के इलेक्ट्रिक सर्किट में खराबी है. इसके कारण शरीर में झटके आना, बेहोशी या कुछ समय के लिए सुन्न हो जाना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें, न कि तांत्रिक की.
डॉ. अजय कहते हैं कि जिन लड़कियों को मिर्गी की बीमारी हो, उन्हें पीरियड्स होने से पहले या इसके दौरान ज्यादा दौरे पड़ सकते हैं. इस स्थिति को कैटामीनिअल सीजर (catamenial seizures) कहते हैं. एक हेल्थ जनरल के अनुसार दुनियाभर में मिर्गी की शिकार 40% महिलाओं को मेंस्ट्रुअल साइकिल की दौरान मिर्गी का दौरा पड़ता है.
डॉक्टर कहते हैं कि, अगर प्रेग्नेंसी के दौरान कोई महिला मिर्गी होने की बात छुपाती है और पहले से बताई गई दवा लगातार ले रही होती है. ऐसी स्थिति में भ्रूण के विकास पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ता है. ऐसे मामलों में बच्चा समय से पहले यानी प्रीटर्म डिलीवरी हो सकती है, बच्चे का वजन कम हो सकता है, बच्चा कटी जीभ, कटे होंठों, कटे प्राइवेट पार्ट या दिल में किसी तरह के डिफेक्ट के साथ पैदा हो सकता है.
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