यूनाइटेड नेशंस का कहना है,कि दुनिया भर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग हर साल बेहतर जीवन की तलाश में अपने देश छोड़कर दूसरे देशों में बसते हैं।…
यूनाइटेड नेशंस का कहना है,कि दुनिया भर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग हर साल बेहतर जीवन की तलाश में अपने देश छोड़कर दूसरे देशों में बसते हैं। क्वालिटी ऑफ लाइफ केवल पैसे से नहीं नापी जातीबल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि लोग अपने रोज़मर्रा के जीवन में कितने स्वस्थ, सुरक्षित और खुश हैं। इसमें हेल्थ सर्विस, एजुकेशन, काम और पर्सनल लाइफ का बैलेंस, रहने का खर्चा, सुरक्षा और पर्यावरण जैसी चीज़ें शामिल होती है।
इन्हीं चीजो को ध्यान में रखते हुए नंबीओ (Numbeo) ने 2025 की क्वालिटी ऑफ लाइफ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दुनिया के कई देशों को अलग-अलग क्राइटेरिया पर परखा गया है। इस रिपोर्ट में यह साफ दिखता है कि कौन-से देश रहने के लिए सबसे बेहतर हैं और किन देशों में लोग अब भी मेहनत कर रहे हैं।
2025 की रिपोर्ट में लग्ज़मबर्ग सबसे ऊपर रहा है। इसे 218.2 नंबर मिले हैं। यह देश अपने नागरिकों को सेफ्टी, खुशहाली और बेहतरीन सरकारी सेवाएँ देती है। दिलचस्प बात यह है कि टॉप 10 में ज़्यादातर यूरोपीय देश शामिल हैं। इनमें केवल ओमान ऐसा देश है जो यूरोप से बाहर है। उसे 215.1 नंबर मिले हैं और यह अपने कम अपराधमॉडर्न स्ट्रक्चर और नेचर की ब्यूटी के लिए जाना जाता है। यह साफ दिखाता है कि जो देश हेल्थ सर्विस,एजुकेशन औरसाफ-सुथरा माहौल में इन्वेस्टमेंट करते हैं, वही अपने लोगों को बेहतर और सुखी जीवन दे पाते हैं।
दूसरी तरफ, नाइजीरिया सबसे नीचे रहा है। इसे सिर्फ 15.6 नंबर मिले हैं। नेचुरल रिसोर्स से भरपूर होने के बावजूद यह देश गरीबी, कमजोर हेल्थ सर्विस, भ्रष्टाचार और सुरक्षा समस्याओं से जूझ रहा है। यहाँ आम लोगों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी काफी कठिन है।पाकिस्तान 76वें स्थान पर है और उसे 105.7 अंक मिले हैं। यहाँ महंगाई, बेरोज़गारी, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएँ और शासन की चुनौतियाँ लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित कर रही हैं।
भारत 62वें स्थान पर है और उसे 124.4 नंबर मिले हैं। हालाँकि भारत ने तकनीक, फ्रेमवर्क और विदेशी इन्वेस्टमेंट में तरक्की की है, लेकिन अब भी कई चुनौतियाँ हैं।गंदगी, बढ़ती जनसंख्या की समस्या, हेल्थकेयर की गैर-बराबरी और गाँव-शहर के बीच बड़ी खाई यहाँ की सबसे बड़ी समस्याएँ हैं।
फिर भी, भारत अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश से बेहतर स्थिति में है। लेकिन ग्लोबल एवरेज में अब भी पीछे है। यह दिखाता है कि देश को अपने नागरिकों के लिए जीवन को और सुरक्षित, हेल्थी और काफी अच्छा बनाने के लिए और मेहनत करनी होगी।
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