Akhilesh Yadav in Parliament: बुधवार को संसद में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के मुद्दे पर बोलने का समय न मिलने पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का गुस्सा फूट पड़ा है. दरअसल, जब उन्हें बोलने की इजाजत नहीं मिली तो नाराज समाजवादी प्रमुख ने स्पीकर ओम बिरला से पूछा कि क्या कोई डील हुई है? दरअसल, अखिलेश यादव ने कांग्रेस और सत्ता पक्ष की बेंचों की ओर इशारा करते हुए स्पीकर से कहा कि यह मुद्दा छात्रों का है, न कि कांग्रेस, BJP या SP का. इसके अलावा, अखिलेश यादव ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आपने उन्हें बोलने दिया.
जिसकी वजह से अखिलेश यादव खासे नाराज नजर आए. जिसके बाद उन्होंने पूछा कि हमारा क्या? क्या उनके बीच कोई समझौता हुआ है. इसके बाद स्पीकर ने सपा सांसद अखिलेश यादव को बोलने की इजाजत दे दी.
कांग्रेस-एसपी में मतभेद?
हालांकि कई लोगों ने अखिलेश के गुस्से को कांग्रेस के साथ मतभेद का संकेत माना, लेकिन बाद में पत्रकारों से बात करते हुए समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर पूरा विपक्ष एकजुट है. इसके अलावा, उन्होंने साफ किया कि मैं छात्रों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का पक्ष रखना चाहता था, इसलिए मैंने बीच में बात रखी. उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल के साथ किसी भी तरह के टकराव से इन्कार किया.
VIDEO | Speaking in the Lok Sabha, Samajwadi Party MP Akhilesh Yadav, says, “This is not an issue of Congress, Samajwadi Party, BJP… this is an issue of students, youths. The way government has behaved… students were thrashed. We were compelled to hold protest outside the… pic.twitter.com/EoCQUtFAoG
— Press Trust of India (@PTI_News) July 22, 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े
अखिलेश यादव के करीबी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, उन्होंने सरकार और स्पीकर के बीच समझौते के लिए डील शब्द का इस्तेमाल किया था. अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर हमला करने के लिए डील शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था. इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संसद में कोई भी चर्चा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही हो सकती है.
सरकार ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
सरकार ने सदन में चर्चा के लिए सहमति तो जताई, लेकिन इस्तीफे की मांग उठाकर चर्चा में देरी करने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया. जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सोमवार को राजधानी में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री से बयान की मांग की. अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए. गुस्साए यादव ने पूछा कि अगर प्रधानमंत्री संसद के बाहर छात्रों के मुद्दे पर बोल सकते हैं तो सदन के अंदर बयान क्यों नहीं दे सकते?
सरकार को लेनी चाहिए इसकी जिम्मेदारी
छात्रों पर कथित हमलों के बारे में बात करते हुए यादव ने कहा कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. विपक्ष का सरकार पर हमला जारी रहने के बीच समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि अगर आप छात्रों की बात नहीं सुनेंगे तो वे सड़कों पर उतर आएंगे. समाजवादी पार्टी के सांसद ने प्रधानमंत्री से बयान की मांग करते हुए कहा कि महिला छात्रों के कपड़े फाड़े गए, छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं, वे लहूलुहान हो गए. उनके अंग टूट गए. क्या हमारे छात्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाना चाहिए? क्या आप हमारी बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे? क्या उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाता है?
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