Political news: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहली बार राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है. केजरीवाल ने बिना राघव चड्ढा का नाम लिए उन पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से पार्टी ने एक बड़ी राजनीतिक सीख ली है. उन्होंने कहा कि अब भविष्य में किसी को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी विश्वसनीयता को कई बार परखा जाएगा.
अब 100 बार ठोक बजाकर देखेंगे
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा भेजा था, जनता ने नहीं. उन्होंने सातों सांसदों पर पार्टी के साथ धोखा करने का आरोप लगाया. केजरीवाल के मुताबिक, AAP ने किसी के साथ धोखा नहीं किया, लेकिन इन नेताओं ने पार्टी के साथ धोखा किया. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी के लिए यह एक राजनीतिक सबक है. केजरीवाल ने कहा कि अब राज्यसभा भेजने से पहले वह 100 बार ठोक बजाकर देखेंगे कि संबंधित व्यक्ति भरोसे के लायक है या नहीं.
चड्ढा समेत सात सांसदों ने छोड़ी थी पार्टी
राघव चड्ढा अप्रैल 2026 में बीजेपी में शामिल हो गए थे. उनके साथ AAP के सात राज्यसभा सांसदों ने भी बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की थी. इस घटनाक्रम के बाद केजरीवाल ने पहली बार इस तरह सार्वजनिक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. केजरीवाल ने हालांकि अपने बयान में राघव चड्ढा का नाम नहीं लिया, लेकिन सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के संदर्भ में उनकी टिप्पणी को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है.
चड्ढा ने AAP पर लगाए थे गंभीर आरोप
बीजेपी में शामिल होने के दौरान राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर अपने सिद्धांतों और ईमानदारी से भटकने का आरोप लगाया था. उन्होंने AAP को ‘टॉक्सिक वर्कप्लेस’ तक करार दिया था. चड्ढा ने दावा किया था कि पार्टी में उनकी आवाज को दबाया गया और उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया. उनके मुताबिक, इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया.
दो तिहाई सांसदों के साथ हुआ था दल बदल
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान AAP के सात राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में जाने का ऐलान किया था. इन सांसदों की संख्या राज्यसभा में AAP के कुल सांसदों की दो तिहाई थी. इसी वजह से दल बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने का रास्ता बना. हालांकि, आम आदमी पार्टी ने उस समय इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई थी. अब केजरीवाल के ताजा बयान से साफ है कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को महज सांसदों के जाने के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक राजनीतिक सबक के रूप में देख रहा है.