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‘अगर मां को बलि चाहिए तो…’ धीरेंद्र शास्त्री ने दिया ऐसा बयान, मच गया सियासी घमासान

Dhirendra Shastri Viral Statement: धीरेंद्र शास्त्री ने पश्चिम बंगाल विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि 'उनका मकसद किसी के खान-पान पर रोक लगाना नहीं, बल्कि पूजा स्थल की पवित्रता और अहिंसा का संदेश देना था'.

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Last Updated: September 10, 2026 09:53:01 IST

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Dhirendra Shastri Viral Statement: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. अब ब्रिटेन में एक प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि ‘उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया. उन्होंने साफ किया कि वह किसी के खाने-पीने की आजादी पर रोक लगाने की बात नहीं कर रहे थे. उनका कहना था कि धार्मिक स्थल और पूजा के माहौल में पवित्रता बनाए रखने की बात करना एक धार्मिक गुरु के तौर पर उनका कर्तव्य है.’

पश्चिम बंगाल विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने दी सफाई

लिलुआ में हुई कथा के बाद शुरू हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि उनके वहां से निकलने के बाद उनके बयान को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई. उन्होंने कहा कि वह आमतौर पर किसी के खान-पान या पहनावे को लेकर टिप्पणी नहीं करते. उन्होंने बताया कि दुर्गा पूजा के संदर्भ में उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि देवी के आसपास पवित्र माहौल रखा जाए और पूजा पंडाल के नीचे मांस का सेवन न किया जाए. उन्होंने कहा कि जिसे जो खाना है, वह अपने घर जाकर खा सकता है. किसी के भोजन पर रोक लगाने वाले वह कौन होते हैं.

बलि प्रथा पर भी रखी अपनी बात

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि एक धार्मिक गुरु होने के नाते वह अहिंसा और जीवों के प्रति दया का संदेश दे सकते हैं. उनका मानना है कि हर जीव को जीने का अधिकार है और सभी जीवों में भगवान का वास माना जाता है. बलि प्रथा को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देवी को बलि की जरूरत है, तो फिर इंसान किसी जीव को क्यों काटता है? उनके मुताबिक, जीव की हत्या अगर सिर्फ स्वाद के लिए की जा रही है, तो इसे धार्मिक बलि कहना सही नहीं है. उन्होंने इसी बात को समझाते हुए कहा, ‘मां कभी अपने बेटे की बलि नहीं मांगती.’ उनका कहना था कि वह किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि अहिंसा का संदेश देने के लिए यह बात कहते हैं.

ये भी पढ़ें: क्या पति पर बलात्कार का आरोप लगाया जा सकता है? SC ने शुरु की ‘यौन दासता’ मामले की सुनवाई, जानें पूरा मामला

बंगाल की संस्कृति का भी किया जिक्र

धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को बंगाल और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह भारत की परंपरा और संतों की शिक्षाओं से जुड़े हुए हैं. उन्होंने दोहराया कि उनका मकसद किसी के खान-पान पर सवाल उठाना नहीं है. हालांकि, जीव हिंसा और बलि प्रथा को लेकर वह अपनी धार्मिक मान्यता और शास्त्रों की बात आगे भी रखते रहेंगे, चाहे किसी को उनकी बात पसंद आए या नहीं.

ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20: ‘मैं पहली बार…’ काजी तौकीर के सपोर्ट में उतरे अरिजीत सिंह, पहली बार करेंगे ये काम

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Dhirendra Shastri Viral Statement: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं. पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. अब ब्रिटेन में एक प्रवचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि ‘उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया. उन्होंने साफ किया कि वह किसी के खाने-पीने की आजादी पर रोक लगाने की बात नहीं कर रहे थे. उनका कहना था कि धार्मिक स्थल और पूजा के माहौल में पवित्रता बनाए रखने की बात करना एक धार्मिक गुरु के तौर पर उनका कर्तव्य है.’

पश्चिम बंगाल विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री ने दी सफाई

लिलुआ में हुई कथा के बाद शुरू हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि उनके वहां से निकलने के बाद उनके बयान को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई. उन्होंने कहा कि वह आमतौर पर किसी के खान-पान या पहनावे को लेकर टिप्पणी नहीं करते. उन्होंने बताया कि दुर्गा पूजा के संदर्भ में उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि देवी के आसपास पवित्र माहौल रखा जाए और पूजा पंडाल के नीचे मांस का सेवन न किया जाए. उन्होंने कहा कि जिसे जो खाना है, वह अपने घर जाकर खा सकता है. किसी के भोजन पर रोक लगाने वाले वह कौन होते हैं.

बलि प्रथा पर भी रखी अपनी बात

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि एक धार्मिक गुरु होने के नाते वह अहिंसा और जीवों के प्रति दया का संदेश दे सकते हैं. उनका मानना है कि हर जीव को जीने का अधिकार है और सभी जीवों में भगवान का वास माना जाता है. बलि प्रथा को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देवी को बलि की जरूरत है, तो फिर इंसान किसी जीव को क्यों काटता है? उनके मुताबिक, जीव की हत्या अगर सिर्फ स्वाद के लिए की जा रही है, तो इसे धार्मिक बलि कहना सही नहीं है. उन्होंने इसी बात को समझाते हुए कहा, ‘मां कभी अपने बेटे की बलि नहीं मांगती.’ उनका कहना था कि वह किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि अहिंसा का संदेश देने के लिए यह बात कहते हैं.

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बंगाल की संस्कृति का भी किया जिक्र

धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को बंगाल और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह भारत की परंपरा और संतों की शिक्षाओं से जुड़े हुए हैं. उन्होंने दोहराया कि उनका मकसद किसी के खान-पान पर सवाल उठाना नहीं है. हालांकि, जीव हिंसा और बलि प्रथा को लेकर वह अपनी धार्मिक मान्यता और शास्त्रों की बात आगे भी रखते रहेंगे, चाहे किसी को उनकी बात पसंद आए या नहीं.

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