Sant Premanand Ji Maharaj: वृंदावन रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उनकी लोकप्रियता विदेशों तक फैली हुई है. महाराज की दिव्य विभूति, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. इसी क्रम में एक शिव भक्त ने संत प्रेमानंद जी से पूछा कि, क्या ये सच है कि 'शिव मंदिर का पुजारी अगले जन्म में कुत्ते की योनी में जाता है'? जानिए आखिर इस सवाल पर वृंदावन से रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी ने क्या जवाब दिया-
संत प्रेमानंद जी से जानिए, क्या शिव मंदिर का पुजारी अगले जन्म में कुत्ता बनता है? (Canva)
Sant Premanand Ji Maharaj: ये सच है कि, भारत हमेशा से साधु-संतों की भूमि रहा है. उन्होंने अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शन, सामाजिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई. इसी तरह वर्तमान में भी कुछ साधु-संतों की खूब चर्चा होती है. वृंदावन रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी का भी नाम इनमें से एक है. उनकी लोकप्रियता विदेशों तक फैली हुई है. महाराज की दिव्य विभूति, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. उनके प्रवचन काफी प्रेरणादायक होते हैं. यही वजह है कि, महाराज के प्रवचन सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिनमें वो तमाम तरह के सवालों का जवाब देते हैं. इसी क्रम में एक शिव भक्त ने संत प्रेमानंद जी से पूछा कि, क्या ये सच है कि ‘शिव मंदिर का पुजारी अगले जन्म में कुत्ते की योनी में जाता है’? पहले तो महाराज जी थोड़ा मुस्कुराए, फिर अगले ही पल वाल्मीकि रामायण में वर्णित वृतांत सुनाया. जानिए आखिर इस सवाल पर वृंदावन से रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी ने क्या जवाब दिया-
संत प्रेमानंद महाराज जी वाल्मीकि रामायण के अनुसार बताते हैं कि, यह सच है कि जिस भी व्यक्ति को शिव मंदिर में पुजारी का कार्य मिलता है वह अगले जन्म में कुत्ते के रूप में वापस पृथ्वी पर लौटकर आता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, एक बार की बात है कि, एक ब्राह्मण देवता भिक्षा मांगने के लिए घर से निकले और 5 घरों में उन्होंने भिक्षा मांगी, लेकिन उन्हें कहीं से भी उस दिन भोजन प्राप्त नहीं हुआ. ऐसे में ब्राह्मण गुस्से में घर लौटने लगे और इसी बीच रास्ते में उन्हें शिव मंदिर दिखा. शिव मंदिर जा ही रहे थे कि रास्ते में एक कुत्ते को देखा तो गुस्से में उसे डंडे से बहुत पीट दिया. इसके बाद ब्राह्मण तो घर चले गए मगर कुत्ते ने शिव जी को घायल अवस्था में पुकारा.
इसके बाद कुत्ता भगवान के दरवार में पहुंचा और अपना दुख जाहिर किया. कहा, महाराज मुझे ब्राह्मण देव ने बिना किसी कारण पीट दिया.भगवान सब जीवों की भाषा समझते हैं. इस पर भगवान ने कहा कि, मेरे दरवार में ब्राह्मण को दंड नहीं दिया जाता है. अब आप ही निश्चय करो कि इनको क्या दंड दिया जाए. इस उसने कहा कि, प्रभु यहां का जो बहुत श्रेष्ठ कलंजर पर्वत है, उसमें जो आश्रम है उसका इनको महंत बना दीजए.
कुत्ते की बात सुन भगवान शिव बोले, तुम इनको दंड दे रहे हो या वरदान. इस पर कुत्ता बोला, प्रभु मैं पूर्व में महंत ही था. इसलिए मैं आपको कह रहा हूं कि, जब ये भी महंत बनेंगे न और मनमानी आचरण करेंगे और भगवत अर्पित बिना किए जो भगवान के लिए आता है वो खाएंगे तो कुत्ता बनेंगे. तब हमारे जैसा इनको भी पता चलेगा कि श्वान योनि में कितना कष्ट होता है.
फिर महाराज जी बोले- आप इसका रहस्य समझ पाए? वे कहते हैं कि, इसका रहस्य यह है कि जो भगवान के अर्पित करने के लिए आता है. वो आप शिव मंदिर की केवल बात नहीं है. किसी भी मंदिर की बात है. ब्रज के भक्तों में चरित्र आता है.
एक दिन एक विरक्त संत जो गुफा में भजन करते थे, जैसे गिरिराज जी हैं, नंदगाव है, बरसाना है. यानी यहां पर्वत और गुफाएं भी हैं. तो वे संत एक दिन एकांतिक भिक्षा मांग के आ रहे थे. पीछे से आवाज आई कि, बाबा सुन… अगर मुझे थोड़ा सा टुकड़ा दे दे तो मेरी प्रेत योनि से मुक्ति हो जाए. इस पर संत ने देखा तो वहां कोई दिखाई ही नहीं दिया. वहां एक कुत्ता दिखाई दिया तो बाबा को लगा कि शायद ऐसे ही मेरा भ्रम है. लेकिन, जैसे ही बाबा चले तो फिर आवाज आई- क्या आपने मेरी बात सुनी नहीं? बाबा फिर पीछे मुड़े और कहा कि कौन हो तुम?
संत के सवाल पर वह बोला कि, ये जो मैं कुत्ता रूप दिखाई दे रहा हूं वो मैं नंदालय का पुजारी हूं. तो संत ने कहा, प्रभु आप तो भगवत पार्षद हैं आपकी ऐसी यह हालत कैसे- इस वो बोला कि, लाला के लिए अमरिया आता था और बिना भोग लगाए हमने उसको प्रयोग किया तो उसी के दंड में मेरी ऐसी हालत हुई है. अगर आप हमें अपनी झूठन दे देंगे तो मैं अभी मुक्त हो जाऊंगा. इस पर संत बोले- भैया यदि तुम्हें झूठन करके दोष मुक्त और भगवत प्राप्ति हो रही है. तो ये लीजिए मेरा झूठन.
प्रेमानंद महाराज बोले- इसका मतलब है कि, शिव मंदिर ही नहीं, किसी भी मंदिर में. आपके शिवजी के लिए कुछ भी आया आप उनको अर्पित कर दीजिए. इसके बाद प्रसाद के रूप में आप सेवन करते हैं तो आपकी दुर्गति नहीं हो सकती है. लेकिन, आज हो क्या रहा है कि, जिससे जो भी वस्तु आई उसे आप अपने प्रयोग में, बिना स्वामी को अर्पित किए वो अपराध बन जाएगा.
RBI Action: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों…
Rishika Dutta Video: सोशल मीडिया पर एक महिला ने वीडियो बनाकर बनाता कि उन्होंने एक…
इंग्लैंड के अनुभवी ऑलराउंडर लियाम डॉसन ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी…
अगर आप भी गर्मियों के मौसम में अपनी त्वचा को ग्लोइंग बनाना चाहते हैं, तो…
Viral Video: इंटरनेट पर एक हैरान करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक…
Funny Jokes of the Day: हेल्थ एक्सपर्ट भी खुश रहने की सलाह देते हैं. आपकी…