साल 2025 में पृथ्वी के महासागर रिकॉर्ड तोड़ गर्म रहे. इसके पीछे का कारण ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) के कारण पृथ्वी की अधिकांश अतिरिक्त गर्मी महासागरों में समा गई थी. आइए जानते हैं कि इसका असर भविष्य में क्या पड़ने वाला है?
world's Ocean
Climate Future of Planet: धरती पर मौसम का संतुलन बना रहे, इसमें समुद्रों की बड़ी भूमिका होती है. जब समुद्र तेजी से बदलते हैं, तो इसका धरती पर भी असर पड़ता है. 9 जनवरी 2026 को Advances in Atmospheric Sciences नाम की जर्नल में छपी एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि साल 2025 में समुद्रों ने अब तक की सबसे ज्यादा गर्मी सोखी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में समुद्रों ने करीब 23 जेटा जूल ऊर्जा अपने अंदर जमा की है. ये मात्रा इतनी ज्यादा है कि इसे इंसानों द्वारा करीब 37 साल में इस्तेमाल की गई ऊर्जा के बराबर माना जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि 2025 में महासागर इतने गर्म क्यों थे?
बता दें कि वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) की बढ़त के कारण पृथ्वी की जलवायु गर्म हुई और महासागर पृथ्वी की अधिकांश अतिरिक्त गर्मी को अवशोषित करते हैं. इसके कारण समुद्र को धरती का सबसे बड़ा हीट स्टोर बी माना जाता है. इससे धरती का तापमान बढ़ता है. वैज्ञाननिकों का कहना है कि समुद्र में जमा गर्मी जलवायु परिवर्तन का सबसे भरोसेमंद संकेत होता है.
गर्म समुद्र जब अधिक नमी और ऊर्जा छोड़ते हैं, तो इससे आने वाला तूफान और अधिक विनाशकारी हो जाता है.लगातार गर्मी और हीटवेव प्रवाल विरंजन और मृत्यु का कारण बनते हैं. इससे समुद्री खाद्य श्रृंखलाएँ बाधित होती हैं और मछलियों की आबादी को भी खतरा होता है. जब समुद्र गर्म होते हैं, तो अधिक वाष्पीकरण और बारी बारिश होती है. इसका एक उदाहरण 2025 में देखने को मिला, जब एशिया में विनाशकारी बाढ़ और मध्य पूर्व व अन्य जगहों पर सूखे जैसी घटनाएं देखने को मिलीं.
बता दें कि 2025 में समुद्र ऊपरी सतह का तापमान अब तक तीसरा सबसे ज्यादा रहा. ये सामान्य से लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. गर्म समुद्र ज्यादा भाप बनाते हैं. इसके कारण तेज बारिश, बाढ़, खतरनाक चक्रवात जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. इसी कारण 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया में भारी बाढ़, मिडिल ईस्ट में सूखा और कुछ इलाकों में अचानक तेज बारिश हुई. अगर भविष्य में भी समुद्र गर्म होते हैं, तो इस तरह के हालात देखने को मिल सकते हैं.
इस मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक धरती पर गर्मी बनी रहेगी, तब तक समुद्र उसे सोखते रहेंगे और नए रिकॉर्ड बनते रहेंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर वक्त रहते लोग सजग हो जाएएं और प्रदूषण व गैसों के उत्सर्जन को कम करें, तो हालातों को अब भी संभाला जा सकता है.
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