FAIMA Letter: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में गड़बड़ियों को रोकने के लिए उनसे तुरंत दखल देने की मांग की है. इसने NEET में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की है और जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक को उनकी भूख हड़ताल से जबरन हटाए जाने पर चिंता जताई है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि उसने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर NEET में बार-बार हो रही गड़बड़ियों, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों पर तुरंत दखल देने की मांग की है.
FAIMA ने एक्स पर क्या लिखा?
FAIMA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हमने सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी सेहत के बारे में दिन में दो बार पारदर्शी मेडिकल बुलेटिन जारी करने का भी अनुरोध किया है, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनकी गरिमा, कानूनी अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की पूरी तरह से रक्षा की जाए. छात्र पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय के हकदार हैं. एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि नीट परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के बार-बार लग रहे आरोपों ने देश की मेडिकल प्रवेश प्रणाली में लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा बुरी तरह कम कर दिया है.
छात्रों में पैदा हो रहा मानसिक तनाव
इन बार-बार होने वाली घटनाओं ने परीक्षा देने वालों में बहुत ज्यादा मानसिक तनाव पैदा किया है. यह बहुत चिंता की बात है कि इन विवादों के बाद कई छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है, जो सिस्टम की नाकामियों की वजह से होने वाले गंभीर मानवीय नुकसान और सार्थक सुधारों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है. एसोसिएशन ने यह भी कहा कि उसने NTA की जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए व्यापक सुधारों की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है.
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FAIMA ने राष्ट्रपति से किया ये अनुरोध
FAIMA ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि नीट परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के सभी मामलों की उच्च-स्तरीय स्वतंत्र जांच हो, परीक्षा आयोजित करने में हुई चूक के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए और पारदर्शिता व जनता का भरोसा बहाल करने के लिए NTA में व्यापक संरचनात्मक सुधार किए जाएं. इसने कहा कि अगर सुधारात्मक उपायों के बावजूद बार-बार नाकामियां होती रहती हैं, तो NTA को भंग करने और उसका पुनर्गठन करने, या एक वैकल्पिक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
इसके अलावा, जहां बार-बार सिस्टम की नाकामियां हुई हैं और पर्याप्त रोकथाम के उपाय सुनिश्चित नहीं किए गए हैं, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सहित मंत्री की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए.
सोनम वांगचुक के अनशन पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर एसोसिएशन ने जोर देते हुए कहा कि जब तक उनकी हालत स्थिर नहीं हो जाती, तब तक उनकी सेहत के बारे में दिन में दो बार (सुबह और शाम) आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाए. साथ ही उनके सम्मान और कानूनी अधिकारों का ध्यान रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ उनका इलाज किया जाए. वे चाहते हैं कि वांगचुक के परिवार और अधिकृत प्रतिनिधियों को उनकी मेडिकल स्थिति के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाए.